आलोट। एक 30 वर्षीय पटवारी के आत्महत्या करने के बाद प्रशासनिक हलके में हड़कंप मच गया है। मृतक की पहचान रवि शंकर खराड़ी के रूप में की गई है, जो आलोट तहसील के खजुरी सोलंकी गांव में हल्का नंबर 34 के पटवारी थे। उन्होंने अपने पीछे एक सुसाइड नोट छोड़ा है, जिसमें उन्होंने नायब तहसीलदार सविता राठौर पर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। नोट में उन्होंने लिखा कि उन्हें बार-बार नियमों के खिलाफ काम करने के लिए दबाव डाला जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनसे स्पॉट रिपोर्ट, पंचनामा और नक्शा बंटवारे के रिकॉर्ड में बदलाव करने को कहा जाता था। रवि ने लिखा कि वे इस तरह के दबाव में नौकरी नहीं कर सकते।
मानसिक दबाव-छुट्टी न मिलने का किया जिक्र
रवि शंकर खराड़ी ने अपने नोट में बताया कि उन्हें अपने भाई की शादी में शामिल होने के लिए छुट्टी तक नहीं दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें बार-बार अधिकारी के आवास पर बुलाया जाता था, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान हो गए। नोट में रणजीत सिंह नाम के एक व्यक्ति का भी उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि उनके ऊपर इस व्यक्ति के पक्ष में काम करने का दबाव बनाया जा रहा था। रवि ने दावा किया कि उनके पास इस प्रताड़ना से जुड़े ऑडियो रिकॉर्डिंग मौजूद हैं। उन्होंने लिखा कि जब उन्होंने गलत काम करने से इनकार किया, तो उन्हें डराने के लिए शो-कॉज नोटिस दिया गया। उनके शब्दों में, मैं इस तरह के दबाव में नौकरी नहीं कर सकता।
घटना के बाद पटवारियों में आक्रोश
इस घटना के बाद आलोट तहसील के अन्य पटवारियों ने भी अधिकारी के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। कुछ पटवारियों ने दावा किया कि उन्हें भी इसी तरह के दबाव और व्यवहार का सामना करना पड़ा है। पुलिस ने मौके से सुसाइड नोट जब्त कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार जांच में सुसाइड नोट में बताए गए सबूतों को भी खंगाला जाएगा। रवि शंकर खराड़ी की नियुक्ति सहानुभूति के आधार पर हुई थी और वे पिछले दो साल से सेवा में थे। उनके परिवार में पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं, जो अब बेसहारा हो गए हैं। यह घटना प्रशासनिक तंत्र में कार्यस्थल के तनाव और जवाबदेही पर एक गंभीर सवाल खड़ा करती है।
नायब तहसीलदार ने आरोपों को किया खारिज
नायब तहसीलदार सविता राठौर ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने कहा उन्हें समझ नहीं आ रहा कि रवि जैसे समझदार व्यक्ति ने ऐसा कदम क्यों उठाया। उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा उन पर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। फिलहाल पुलिस और प्रशासन इस मामले की जांच कर रहे हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि सुसाइड नोट में लिखी बातें कितनी सत्य हैं। इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और कार्यस्थल के व्यवहार पर बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजरें जांच के निष्कर्ष पर टिकी हुई हैं, जो इस मामले की सच्चाई सामने लाएगा।










