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मेरठ के चर्चित 'नीला ड्रम केस' में कोर्ट के फैसले से पहले मुख्य आरोपी मुस्कान ने जेल में उपवास शुरू कर दिया है, सजा के डर से आरोपी घबराए हुए हैं और फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

मेरठ के बहुचर्चित सौरभ हत्याकांड जिसे पूरी दुनिया 'नीला ड्रम केस' के नाम से जानती है, उसमें अब कोर्ट का अंतिम फैसला आने वाला है, फैसले की तारीख नजदीक आते ही मुख्य आरोपी मुस्कान के चेहरे पर डर साफ दिखने लगा है।

जेल सूत्रों के मुताबिक मुस्कान पिछले तीन दिनों से उपवास पर है और उसने अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं किया है, इसे सजा का खौफ कहें या ईश्वर के प्रति अचानक जगी आस्था, लेकिन मुस्कान अब ज्यादातर समय खामोश रहती है।

उसकी इस हालत को देखकर जेल प्रशासन भी काफी सतर्क है और उसकी सेहत पर लगातार नजर रखी जा रही है, मेरठ की यह घटना एक बार फिर लोगों के जेहन में ताजा हो गई है जब सौरभ की हत्या कर उसकी लाश को नीले ड्रम में छिपाया गया था।

​सिर्फ मुस्कान ही नहीं बल्कि इस केस से जुड़े अन्य आरोपी भी फैसले को लेकर काफी घबराए हुए हैं, जेल के भीतर आरोपी अक्सर सुरक्षाकर्मियों और मिलने आने वालों से एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि उन्हें कितनी सजा हो सकती है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सबूतों की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को कड़ी सजा मिलना लगभग तय है, इसी डर ने जेल की सलाखों के पीछे बंद इन आरोपियों की नींद उड़ा दी है, सौरभ के परिवार ने लंबे समय तक न्याय की लड़ाई लड़ी है और अब कोर्ट के फैसले के जरिए उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है, मेरठ का यह 'नीला ड्रम केस' अपनी क्रूरता के कारण उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक रहा है।

​इस हत्याकांड ने मेरठ को हिलाकर रख दिया था जब सौरभ नाम के युवक की बेरहमी से हत्या करने के बाद उसकी लाश को एक नीले प्लास्टिक के ड्रम में बंद कर ठिकाने लगाने की कोशिश की गई थी।

पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद इस पूरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझाई थी और मुस्कान सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था, कोर्ट में चली लंबी बहस और गवाहों के बयानों के बाद अब वह समय आ गया है जब दोषियों के भाग्य का फैसला होगा।

जेल में मुस्कान का लगातार तीन दिनों तक उपवास रखना यह दर्शाता है कि अब अपराध की दुनिया का अंत कानून के डंडे से होने वाला है, फैसले के दिन कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहने की संभावना है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

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