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कायराना हमले में अपनी जान गंवाने वाले करनाल के वीर सपूत लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की याद में आज उनके बचपन के स्कूल, संत कबीर में प्रार्थना सभा आयोजित की गई।

22 अप्रैल 2025 की वो तारीख जब कश्मीर की वादियों में गोलियों की तड़तड़ाहट ने देशभर के 26 परिवारों की खुशियां छीन ली थीं। उस कायराना आतंकी हमले को आज एक वर्ष बीत चुका है। इस हमले में हरियाणा के करनाल जिले के सेक्टर-6 निवासी जांबाज लेफ्टिनेंट विनय नरवाल ने भी अपनी शहादत दी थी।

शादी के महज कुछ दिनों बाद ही देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले इस वीर योद्धा की पहली बरसी पर आज पूरा शहर गमगीन है। विनय की याद में आज उनके बचपन के स्कूल में विशेष प्रार्थना सभा की गई, जहां परिवार, शिक्षकों और बच्चों ने नम आंखों से इस बलिदानी को नमन किया। 

बहन बोली- दीप जलाते वक्त उनके हाथ कांप रहे थे  
सेक्टर-8 स्थित संत कबीर स्कूल, जहां विनय और उनकी बहन सृष्टि ने पढ़ाई की थी आज उसी प्रांगण में उनकी शहादत को याद किया गया। स्कूल परिसर में विनय की स्मृति में एक विशेष दीवार बनाई गई है। प्रार्थना सभा में शहीद के पिता राजेश नरवाल, बहन सृष्टि और दादा हवा सिंह शामिल हुए। 

जब विनय के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किया गया, तो माहौल अत्यंत भावुक हो गया। उनकी बहन सृष्टि ने बताया कि दीप जलाते वक्त उनके हाथ कांप रहे थे। वह पल ऐसा था जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। परिवार के लिए यह यकीन करना आज भी कठिन है कि विनय अब उनके बीच नहीं हैं।

किसी ने नहीं सोचा था वो आखिरी कॉल होगी  
शहीद की बहन सृष्टि ने उस मनहूस दिन को याद करते हुए बताया कि सुबह पिता और दादा की विनय से फोन पर सामान्य बातचीत हुई थी। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह उनकी आखिरी कॉल होगी। कुछ ही घंटों बाद आई एक खबर ने पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी। 

सृष्टि कहती हैं कि अपने माता-पिता को इस असहनीय पीड़ा से गुजरते देखना एक संतान के लिए सबसे बड़ा दुख है। मैं कोशिश करती हूं कि पुरानी अच्छी यादों के जरिए उन्हें संभालूं, ताकि विनय हमारे दिलों में हमेशा जीवित रहे। उन्होंने मांग की कि सरकार विनय की बहादुरी के सम्मान में किसी शिक्षण संस्थान या चिकित्सा केंद्र का नाम उनके नाम पर रखें। 

सपनों का वो सफर जो अधूरा रह गया 
लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की कहानी किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती है, लेकिन इसका अंत अत्यंत दुखद रहा, 16 अप्रैल 2025 को विनय का विवाह हिमानी के साथ धूमधाम से हुआ था। नवविवाहित जोड़ा अपनी नई जिंदगी की शुरुआत के लिए हनीमून पर जाने की योजना बना रहा था। पहले उनका इरादा यूरोप जाने का था, लेकिन वीजा में देरी के कारण उन्होंने आखिरी वक्त पर जम्मू-कश्मीर जाने का निर्णय लिया।

शादी के मात्र 5-6 दिन बाद ही वे कश्मीर पहुंचे थे, 22 अप्रैल को जब वे पहलगाम की खूबसूरत बैसरन घाटी में घूम रहे थे, तभी आधुनिक हथियारों से लैस आतंकियों ने पर्यटकों को घेरकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। आतंकियों ने पहचान पूछ-पूछकर लोगों को निशाना बनाया। विनय ने अपनी पत्नी के सामने ही शहादत दी; उनकी गर्दन और छाती में कई गोलियां लगी थीं। 

विनय का अपने दादा से गहरा लगाव था 
शहीद के पिता राजेश नरवाल बताते हैं कि विनय की परवरिश में उनके दादा-दादी का बड़ा योगदान रहा, क्योंकि उनकी सरकारी नौकरी के कारण वे अक्सर बाहर रहते थे। विनय का अपने दादा से गहरा लगाव था।

राजेश नरवाल ने साझा किया कि शादी की तैयारियों के दौरान दिल्ली जाते समय विनय ने अपनी भविष्य की प्लानिंग के बारे में विस्तार से बात की थी। उसने बताया था कि वह अपने बच्चों के नाम क्या रखेगा, उन्हें कहां पढ़ाएगा और रिटायरमेंट के बाद का जीवन कैसे बिताएगा। उसने घर को फिर से बनवाने का सपना भी संजोया था। आज वो सारी बातें पिता के दिल को छलनी कर देती हैं।

आतंक के खिलाफ आक्रोश 
दुख की इस घड़ी में परिवार को श्रीमद्भागवत गीता के पाठ से मानसिक संबल मिल रहा है। पिता राजेश नरवाल ने कहा कि उन्हें सरकार द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई पर गर्व है। 'ऑपरेशन सिंदूर' और 'ऑपरेशन महादेव' के जरिए सुरक्षा बलों ने आतंकियों को जो मुंहतोड़ जवाब दिया, उससे शहीद के परिवार को कुछ हद तक सांत्वना मिली है।

उन्होंने देशवासियों से अपील की कि आतंकवाद एक वैश्विक बीमारी है और इसे जड़ से खत्म करने के लिए हर नागरिक को सतर्क रहना होगा। उन्होंने कहा कि अगर कहीं भी संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को सूचना दें। 

जन्मदिन पर 1 मई को लगेगा रक्तदान शिविर 
विनय नरवाल की सेवा भावना को आगे बढ़ाते हुए परिवार ने उनके जन्मदिन के अवसर पर विशेष आयोजन करने का निर्णय लिया है। आगामी 1 मई को विनय का जन्मदिन है, जिस उपलक्ष्य में करनाल में एक विशाल रक्तदान शिविर लगाया जाएगा। राजेश नरवाल का मानना है कि रक्तदान के जरिए दूसरों की जान बचाना ही उनके बेटे के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। 

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