लखनऊ: राजधानी लखनऊ की एनआईए/एटीएस (NIA/ATS) कोर्ट ने अवैध धर्मांतरण मामले में 'छांगुर गिरोह' के सदस्यों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, यह गिरोह केवल लोगों का धर्म ही नहीं बदल रहा था, बल्कि उनके भीतर देश विरोधी भावनाएं भरकर भारत में 'शरिया कानून' स्थापित करने के सपने देख रहा था।
आरोपी छांगुर यादव और उसके साथियों ने एक संगठित नेटवर्क बनाया था, जिसका उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्था को चुनौती देना और धार्मिक असंतुलन पैदा करना था।
कोर्ट में पेश किए गए साक्ष्यों के अनुसार, यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से अपना काम करता था। गिरोह के सदस्य गरीब बस्तियों और ग्रामीण इलाकों में जाकर लोगों को पहले बीमारियों और समस्याओं का डर दिखाते थे और फिर धर्मांतरण करने पर 'चमत्कारी समाधान' और आर्थिक मदद का लालच देते थे।
जो लोग लालच में नहीं आते थे, उन्हें नरक का भय दिखाकर डराया जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे खेल के लिए बड़े पैमाने पर फंडिंग की जा रही थी, जिसका मुख्य उद्देश्य मतांतरण के जरिए एक कट्टरपंथी जमात तैयार करना था।
विशेष न्यायाधीश ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ आईपीसी और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं। कोर्ट ने माना कि यह गिरोह न केवल धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहा था, बल्कि देश की संप्रभुता को भी खतरे में डाल रहा था।
अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि इनके पास से ऐसे साहित्य और डिजिटल सबूत मिले हैं, जो सीधे तौर पर शरिया कानून की वकालत और संवैधानिक मूल्यों के अपमान की पुष्टि करते हैं।
एटीएस की जांच अब इस गिरोह के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की ओर मुड़ गई है। आशंका जताई जा रही है कि छांगुर गिरोह को खाड़ी देशों और अन्य कट्टरपंथी संस्थाओं से वित्तीय सहायता मिल रही थी।
गिरोह के सदस्यों के बैंक खातों में संदिग्ध लेन-देन पाए गए हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस नेटवर्क के तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। कोर्ट ने अब इस मामले में गवाहों की गवाही शुरू करने के आदेश दिए हैं, जिससे आने वाले दिनों में कई और बड़े नामों का खुलासा होने की उम्मीद है।










