लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में संचालित 'स्कूल चलो अभियान-2026' ने प्रदेश में शिक्षा की नई अलख जगा दी है। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के शुरू होते ही प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में रिकॉर्ड 8.79 लाख बच्चों का नया नामांकन हुआ है।
यह आंकड़ा उन बच्चों की स्कूल वापसी का गवाह है, जो किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ चुके थे या अब तक स्कूल से वंचित थे। मुख्यमंत्री के 'जीरो ड्रॉपआउट' के लक्ष्य को धरातल पर उतारते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने हर घर तक शिक्षा की रोशनी पहुँचाने का जो संकल्प लिया था, वह अब हकीकत में बदलता दिख रहा है।
यूपी के सरकारी स्कूलों की इस बदली हुई तस्वीर के पीछे मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट 'ऑपरेशन कायाकल्प' है। प्रदेश के 1.36 लाख से अधिक विद्यालयों को इस अभियान के तहत अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है।
आज यूपी के परिषदीय स्कूल कॉन्वेंट स्कूलों को टक्कर दे रहे हैं, जहाँ स्मार्ट क्लास, साफ पेयजल, अलग-अलग शौचालय और खेल के मैदान जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। सरकार द्वारा स्कूली शिक्षा पर 80,000 करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम बजट खर्च किया जा रहा है, जिसका सीधा परिणाम नामांकन में हुई इस भारी बढ़ोतरी के रूप में सामने आया है।
योगी सरकार ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाते हुए डीबीटी के जरिए बच्चों के यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, स्वेटर और स्कूल बैग के पैसे सीधे अभिभावकों के खातों में भेजे हैं। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि गरीब परिवारों का सरकारी स्कूलों के प्रति विश्वास भी सुदृढ़ हुआ है।
पहले दिन ही बच्चों को नई किताबें और बैग वितरित किए गए, जिससे उनके भीतर पढ़ाई के प्रति एक नया उत्साह देखा जा रहा है। सरकार की इस नीति ने उन बिचौलियों को खत्म कर दिया है जो पहले बच्चों के हक पर डाका डालते थे।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए केवल इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि मानव संसाधन पर भी विशेष ध्यान दिया है। हाल ही में 1.70 लाख शिक्षामित्रों और 24,000 अनुदेशकों के मानदेय में बड़ी वृद्धि कर उन्हें प्रोत्साहित किया गया है।
साथ ही, शिक्षकों, अनुदेशकों और रसोइयों को 5 लाख रुपये का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा देकर सरकार ने उनकी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की है। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से आह्वान किया है कि वे हर गांव और टोले में जाकर उन बच्चों को चिन्हित करें जो स्कूल नहीं आ रहे हैं, ताकि यूपी 100 प्रतिशत साक्षरता के लक्ष्य को प्राप्त कर सके।










