Alamgir Gate Mandu: मध्यप्रदेश। मांडू-धार मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक आलमगीर दरवाजे में 50 फीट लंबा कंटेनर फंस गया। इसके चलते दरवाजे से सटी एक साइड की दीवार क्षतिग्रस्त हो गई है। कंटेनर के कारण इस रास्ते में दोनों ओर से जाम लग गया। कई टूरिस्ट यहां फंस गए हैं।
सुबह करीब 9 बजे से फंसा है कंटेनर
बताया जा रहा है कि, चालाक ने कंटेनर को निकालने की कोशिश की लेकिन रास्ता संकरा है और कंटेर फंस गया। मामले की सूचना पुलिस को दी गई। सुबह करीब 9 बजे कंटेनर यहां फंसा था। पुलिस के साथ नगर निगम की टीम भी मदद के लिए पहुंची लेकिन कंटेनर अब तक बाहर नहीं निकला है।
जीपीएस फॉलो करते यहां तक पहुंचे
मांडू आने-जाने वाले वाहन भी फंस गए हैं। कुछ बसें यात्रियों को उतार कर वापस लौट गई।
कंटेनर गुजरात का है। चालाक ने बताया कि, वे धरमपुरी जा रहे थे। उन्हें रास्ते का पता नहीं था इसलिए मैप की मदद से आगे बढ़ रहे थे। जीपीएस फॉलो करते हुए वे मांडू-धार मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक आलमगीर दरवाजे तक पहुंच गए।
20 फीट से लंबा वाहन अंदर नहीं जा सकता
गौरतलब है कि, आलमगीर दरवाजे की बनावट ऐसी है कि, 20 फीट से लंबा वाहन दरवाजे से नहीं निकल सकता। अगर किसी यात्री के वाहन की लंबाई 19 फीट से अधिक होती है तो दरवाजे के बाहर ही वाहन को रोकना पड़ता है। इसके आगे का सफर टैक्सी और ऑटो से किया जाता है।
मांडू के प्रसिद्ध आलमगीर दरवाजे का इतिहास
मांडू में 12 मुख्य द्वार हैं। आलमगीर दरवाजा इन्हीं में से एक है। इसका नाम मुगल बादशाह औरंगजेब के नाम पर रखा गया। उन्हें आलमगीर की उपाधि भी दी गई है। सुरक्षा और वास्तुकला की दृष्टि से यह गेट काफी अहम है। दरवाजे का निर्माण मांडू के सुल्तानों के समय हुआ था। 1668 ईस्वी में औरंगजेब ने मांडू की यात्रा की थी। उस समय इस दरवाजे का जीर्णोद्धार किया गया। इसके बाद से ही गेट को आलमगीर दरवाजा कहा जाता है।
आलमगीर दरवाजा पहाड़ी पर बसे मांडू में प्रवेश के लिए अहम दरवाजा है। इसे इस तरह बनाया गया था कि, दुश्मन की सेना या हाथी अंदर प्रवेश न कर पाएं। नुकीले मेहराब और मजबूत पत्थर से बने दरवाजे में हिन्दू-इस्लामिक स्थापत्य कला का उपयोग हुआ है। दरवाजे को ASI का संरक्षण मिला है।










