Logo
Uttam Nagar Murder Case: उत्तमनगर तरुण हत्याकांड मामले में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई को लेकर MCD ने दिल्ली हाईकोर्ट में आश्वासन दिया है। यहां पढ़ें एमसीडी ने क्या कहा है...

Uttam Nagar Murder Case: उत्तमनगर हत्याकांड में MCD ने आज 17 मार्च मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में आश्वासन दिया है कि उत्तम नगर इलाके में किसी भी अवैध निर्माण को बिना उचित नोटिस के नहीं गिराया जाएगा। बता दें कि होली के दिन 26 साल के तरुण नाम के युवक की उसके पड़ोस में रहने वाले विशेष समुदाय के लोगों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी पक्ष की महिलाओं ने अदालत में याचिका दायर करके कहा था कि प्रशासन उनके घरों को अवैध बताकर तोड़ देगा। MCD के वकील का कहना है कि कोई भी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाएगी।

MCD ने हाईकोर्ट से कहा कि होली के दिन उत्तम नगर में हुई झड़प के दौरान  कुछ लोगों के घरों में किसी भी गैर-कानूनी निर्माण को बिना नोटिस दिए नहीं गिराया गया है। 

जरीना व शहनाज ने डाली याचिका

बता दें कि इस मामले में जरीना व शहनाज नाम की 2 महिलाओं ने याचिका दायर की गई थी। इन्हीं याचिकाओं को लेकर MCD ने न्यायमूर्ति अमित बंसल की पीठ समक्ष बयान दिए थे।दोनों महिलाएं इस मामले में आरोपी इमरान और एक नाबालिग की मां है। पुलिस ने जब इन महिलाओं से पूछताछ की तो उन्होंने कहा कि उन्हें आशंका है कि उनके घरों को गिरा दिया जाएगा। वहीं एमसीडी के आश्वासन के बाद पीठ ने इस मामले में सुनवाई को बंद कर दिया है।

MCD के वकील ने क्या कहा ?

पीठ का कहना है कि MCD की तरफ से सीनियर अधिवक्ता संजय पोद्दार ने आश्वासन दिया है कि नोटिस दिए बिना गैर-कानूनी निर्माण के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी। कोई भी कार्रवाई उच्चतम न्यायालय के फैसले (तोड़-फोड़ पर) के अनुसार होगी। याचिकाकर्ताओं के वकील का कहना है कि उन्हें डर है कि MCD कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना उनका घर गिरा देगी।

बता दें कि 8 मार्च को MCD ने आरोपी परिवार के घर का हिस्सा यह कहकर गिरा दिया था  कि, यह एक नाले पर बना था। जिसके बाद याचिकाओं में महिलाओं ने उत्तम नगर में अपने घरों को MCD द्वारा मनमाने व गैर-कानूनी तोड़-फोड़ से बचाने के लिए निर्देश मांगे थे। इसे लेकर MCD के वकील ने अदालत को भरोसा दिलाते हुए कहा था कि,' इलाके में तोड़-फोड़ का काम चयनित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक नाले पर बने घरों से कब्जा हटाने के लिए किया गया है।' 

7