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Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट में जेपी सिंह नाम एक शख्स ने एक याचिका दायर की है। जो कि चर्चा की विषय बनी हुई है। दरअसल याचिकाकर्ता ने उच्च अदालत में याचिका दायर करते हुए मांग की कि अदालत उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा की सीमाओं को बदल दे।

Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट में आज 29 फरवरी को एक ऐसी याचिका सामने जो कि चर्चा का विषय बनी हुई है। दरअसल, एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने उच्च अदालत में एक याचिका दायर कर मांग की है कि अदालत उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा की सीमाओं को बदल दे। इसके अलावा हरियाणा की राजधानी को चंडीगढ़ के बजाए कुरुक्षेत्र स्थानांतरित करने का केंद्र सरकार को निर्देश दे। इतना ही याचिकाकर्ता ने याचिका में पंजाब और हरियाणा के हाई कोर्ट के भी स्थान को बदलने का जिक्र किया। उसने कहा कि पंजाब के लिए जालंधर में एक अलग उच्च न्यायालय स्थापित किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ है और दोनों राज्यों की हाई कोर्ट भी साझा करते हैं।   

हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका

जानकारी के मुताबिक याचिकाकर्ता का नाम जेपी सिंह है। वह सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता है। उसकी दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कई मांग की है। इस याचिका पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने सुनवाई की। याचिका को देखकर पीठ ने खारिज कर दिया। पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि यह काम संसद का है, अदालत का नहीं। पीठ ने शख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने यह याचिका भारत के संविधान के अनुच्छेद 3 की अनदेखी में तैयार की है।

याचिकाकर्ता को कोर्ट ने लगाई फटकार

इसलिए कोर्ट ने शख्त ने टिप्पणी करते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अब यही सब कुछ बचा है। अब कोई हमसे भारत का नक्शा दोबारा बनाने के लिए कह रहा है। पीठ ने फटकार लगाते हुए याचिकाकर्ता से सवाल पूछा कि आपने खुद को केवल उत्तर भारत तक ही सीमित क्यों रखा है? आपको देश के अन्य हिस्सों में भी जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि हम राज्यों की सीमाओं को नहीं पहचानते, यह कोर्ट के क्षेत्र या अधिकार  में नहीं है। 

'अदालतें विधायिका को निर्देश नहीं देती'

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद-3 के अनुसार किसी भी राज्य की सीमाएं केवल संसद द्वारा बदली जा सकती हैं और अदालतें विधायिका को निर्देश नहीं दे सकती हैं। या यह तय नहीं कर सकती हैं कि किस उच्च न्यायालय को कहां से कार्य करना चाहिए। पीठ ने टिप्पणी करते हुए हाई कोर्ट संसद को निर्देश जारी नहीं कर सकते। कोर्ट ने कहा कि हम यह तय नहीं करते कि किस उच्च न्यायालय को कहां से कार्य करना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से की ये मांग

बता दें कि जेपी सिंह ने अपनी याचिका में हाई कोर्ट से मांग की कि केंद्र सरकार को मेरठ कमीश्नरी सहित सोनीपत, फरीदाबाद और गुरुग्राम को दिल्ली के साथ और चंडीगढ़ का हरियाणा के साथ विलय करने का निर्देश दे। याचिकाकर्ता ने कहा कि मेरठ दिल्ली के बहुत नजदीक है, इसलिए ऐसा किया जाना चाहिए।याचिकाकर्ता ने कहा कि मेरठ से दिल्ली की तुलना में लखनऊ बहुत दूर है और मेरठ के लोगों को न्यायिक/प्रशासनिक कार्यों के लिए लखनऊ जाने में कठिनाई होती है। याचिकाकर्ता ने कहा कि पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों की राजधानी चंडीगढ़ है। इसे भी अलग करना चाहिए, हरियाणा की राजधानी कुरुक्षेत्र और पंजाब की राजधानी को जालंधर करनी चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है।
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