Ghaziabad Water Crisis: गाजियाबाद जिले में पानी की कमी बड़ी समस्या बन चुकी है। जिले के पांच ब्लॉकों में से चार डार्क जोन में आते हैं, जहां भूजल का दोहन इतना ज्यादा हो चुका है कि जमीन के नीचे पानी का स्तर तेजी से गिर रहा है। इससे पीने के पानी और खेती-बाड़ी दोनों पर बुरा असर पड़ रहा है। प्रशासन को लगता है कि भविष्य में जल संकट और गहरा हो सकता है, इसलिए इसे रोकने के लिए तुरंत कदम उठाने जरूरी हैं। पुराने समय में जिले में बहुत सारे कुएं थे, जो अब लुप्त हो चुके हैं या बंद हो गए हैं। इन कुओं को फिर से इस्तेमाल में लाकर भूजल स्तर बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
एक हजार पुराने कुओं की खोज
प्रशासन ने जिले में लगभग एक हजार पुराने कुओं की तलाश शुरू कर दी है। ये कुएं सालों पहले इस्तेमाल में थे, लेकिन अब वे ढक चुके हैं या नजर नहीं आते। उनकी पहचान करके उन्हें साफ किया जाएगा और मरम्मत के बाद दोबारा तैयार किया जाएगा। इन कुओं को पुनर्जीवित करने से वर्षा जल संचयन (बारिश का पानी जमीन में उतारना) आसान हो जाएगा। इससे भूजल का स्तर धीरे-धीरे बढ़ेगा और आने वाले समय में पानी की कमी को रोका जा सकेगा। यह अभियान पूरे जिले में चल रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा पुराने कुओं को ढूंढा जा सके।
रिमोट सेंसिंग तकनीक की मदद
कुओं को खोजने के लिए आधुनिक रिमोट सेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह तकनीक सैटेलाइट और अन्य उपकरणों से जमीन की तस्वीरें लेकर पुरानी संरचनाओं का पता लगाती है, जो आंखों से दिखाई नहीं देते। अब तक इस तकनीक से भोजपुर क्षेत्र में 196 कुएं सफलतापूर्वक खोजे जा चुके हैं। बाकी क्षेत्रों में भी इसी तरह की खोज जारी है। रिमोट सेंसिंग से समय और मेहनत दोनों बच रही है, क्योंकि पुराने नक्शे या स्थानीय जानकारी से इतने सारे कुएं ढूंढना मुश्किल होता।
कुओं के पुनरुद्धार से होने वाले फायदे
इन कुओं की सफाई और जीर्णोद्धार के बाद इन्हें वर्षा जल संग्रह के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इन कुओं को दोबारा इस तरह से तैयार किया जाएगा कि इनमें बारिश का पानी जा सके। इससे फायदा यह होगा कि यह पानी जमीन के नीचे रिसकर भूजल को रिचार्ज करेगा। इससे न सिर्फ पानी का स्तर बढ़ेगा, बल्कि भविष्य के जल संकट को भी काफी हद तक रोका जा सकेगा। यह पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद कदम है।










