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पवैया की राज्य वित्त आयोग में नियुक्ति के बाद प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है। लंबित नियुक्तियों को लेकर नेताओं की उम्मीदें बढ़ गई हैं और अब सभी की नजरें दिल्ली हाईकमान पर टिक गई हैं।

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में हाल ही में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है, जिससे लंबे समय से चल रही सियासी सुस्ती अचानक सक्रियता में बदल गई है। पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों में नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। करीब आठ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पवैया की किसी अहम पद पर वापसी हुई है। इसे उनके समर्थक उनके राजनीतिक पुनर्वास के रूप में देख रहे हैं।

अब अन्य पदों पर अटकी लोगों की निगाहें
इस फैसले ने न केवल उनके समर्थकों में उत्साह भरा है, बल्कि उन नेताओं की उम्मीदें भी जगा दी हैं, जो लंबे समय से किसी न किसी पद की प्रतीक्षा कर रहे थे। प्रदेश में कई राजनीतिक नियुक्तियां लंबे समय से लंबित पड़ी हैं। इनमें निगम-मंडल, विभिन्न आयोगों और प्राधिकरणों के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। इन पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया में देरी के चलते कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।

नियुक्ति ने बढ़ाई सियासी हलचल
पवैया की नियुक्ति के बाद माना जा रहा है कि अन्य पदों पर भी जल्द नियुक्तियां की जाएंगी। यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इसके अलावा, जनभागीदारी समितियों और नगर निकायों में एल्डरमैन जैसे पदों के साथ-साथ पार्टी के भीतर विभिन्न मोर्चों और प्रकोष्ठों की नई कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया भी अभी अधूरी है। इन सभी नियुक्तियों को लेकर संगठन के भीतर लगातार चर्चा चल रही है।

अन्य पदों की सूची दिल्ली भेजी
लोग पवैया की नियुक्ति को एक संकेत के तौर पर देख रहे हैं। माना जा रहा है कि अब सरकार और संगठन बाकी बची नियुक्तियों पर भी जल्द फैसला ले सकते हैं। हालांकि नियुक्तियों पर अंतिम निर्णय दिल्ली में होना है। प्रदेश के शीर्ष नेताओं ने संभावित नामों की सूची हाईकमान को भेज दी गई है। कई नेता लॉबिंग में जुट गए हैं, ताकि उन्हें किसी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सके। अब सभी की निगाहें दिल्ली पर टिक गई हैं।

इस लिए की जल्दबाजी में नियुक्ति
राज्य वित्त आयोग का गठन एक निर्धारित समय सीमा के भीतर करना जरूरी था और यह समयसीमा 31 मार्च को खत्म हो रही थी। इस बाध्यता की वजह से सरकार ने तेजी दिखाते हुए आयोग का गठन किया और अध्यक्ष के रूप में पवैया को जिम्मेदारी सौंप दी। उनके साथ पूर्व आईएएस केके सिंह और वित्त विभाग के पूर्व अधिकारी वीरेंद्र कुमार को भी अहम पदों पर नियुक्त किया गया है।

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