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Janakpuri Bike Accident: दिल्ली के जनकपुरी में बाइक हादसे मामले में पुलिस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट में 3 लोगों को आरोपी बनाया गया है, और इनके खिलाफ गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।

Janakpuri Bike Accident: दिल्ली पुलिस द्वारा द्वारका कोर्ट में जनकपुरी में बाइक हादसे के दौरान कमल ध्यानी की मौत के मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। बता दें ध्यानी नाम का युवक इसी साल फरवरी में बाइक चलाते समय एक गड्ढे में गिर गए थे, और उनकी मौत हो गई थी। पुलिस ने इस मामले में 3 लोगों को आरोपी बनया है। इसके अलावा केस में आपराधिक साजिश और गैर-इरादतन हत्या से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं। 

जानकारी के मुताबिक, जुडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास हरजोत सिंह औजला ने चार्जशीट पर विचार करने के लिए 30 अप्रैल की तारीख तट कर दी है। इस मामले में अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख पर SHO को स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया है।

जुडिशियल मजिस्ट्रेट औजला ने 7 अप्रैल को आदेश दिया था कि इस मामले को विचार करने के लिए  30 अप्रैल को फिर से लिस्ट किया जाए। अगली सुनवाई की डेट पर मामले में जांच अधिकारी और SHO को लब किया जाए। 

केस में कौन सी धाराएं लगाई हैं ?

दिल्ली पुलिस ने इस हादसे में राजेश कुमार प्रजापति और योगेश नाम के आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। बताया जा रहा है कि दाखिल चार्जशीट में 3 लोगों को आरोपी बनाया गया है,  राजेश और योगेश भी शामिल हैं। पुलिस ने इस मामले में  बीएनएस की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या), 238 A (सबूत मिटाना), 61 (2) (छोटे अपराध के लिए आपराधिक साजिश), 238 B (बड़े अपराध में सबूत मिटाना) और 340 (2) (जाली दस्तावेजों को असली के तौर पर इस्तेमाल करना) जैसी धाराएं लगाई हैं। 

आरोपी की जमानत याचिका खारिज

बता दें कि बीते दिन बुधवार को सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश कुमार की जमानत याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। राजेश ने याचिका में आरोप लगाया था कि उन्हें  पुलिस थाने में गैर-कानूनी रूप से हिरासत में रखा गया है। जुडिशियल मजिस्ट्रेट ने कहा कि रिकॉर्ड पर सामने वाले गेट की CCTV फुटेज, गिरफ्तारी मेमो, जीडी एंट्री और CDR रिकॉर्ड रखे गए हैं।

इन सबूतों से यह साबित होता है कि आरोपी गैर कानूनी तरीके से हिरासत में नहीं रखा गया था। राजेश की गिरफ्तारी और उसके बाद की हिरासत 7 फरवरी को जांच की सामान्य प्रक्रिया के तहत ही हुई थी। उन्होंने थाने से  CCTV फुटेज मंगवाने के लिए निर्देश देने की मांग की थी। हालांकि दिल्ली पुलिस चार्जशीट के साथ CDR भी जमा कर चुकी है।  

सबूत से कुछ साबित नहीं हुआ-कोर्ट

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि आवेदक की ओर से दिए गए किसी भी तरह के सबूत से यह साबित नहीं हुआ है कि उसे गैर कानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया हो। इसके अलावा रिकॉर्ड विशेष रूप से सीडीआर कुछ और ही बता रहा है।

ऐसे में कोर्ट ने कहा कि 'जब आरोपों को रिकॉर्ड से कोई समर्थन नहीं मिल रहा हो, अदालत से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वह कोई 'फिशिंग और रोविंग' (तलाश और छानबीन वाली) जांच शुरू करे।' इसके अलावा कोर्ट ने जनकपुरी थाने के जांच अधिकारी/SHO को निर्देश देते हुए कहा था 6 फरवरी से 8 फरवरी तक थाने से जुड़ी सीसीटीवी फुटेज पेश करें। 

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