Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने 22 अप्रैल 2026 को एलपीजी की कमी से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया। याचिका में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एलपीजी सिलेंडर की तीव्र कमी का मामला उठाया गया था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि सरकार उचित कदम नहीं उठा रही, जिसकी वजह से आम लोगों को सिलेंडर मिलना मुश्किल हो गया है और उन्हें कालाबाजारी में बहुत ऊंची कीमत पर गैस खरीदनी पड़ रही है।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की बेंच ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि एलपीजी जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और प्रबंधन पूरी तरह से कार्यपालिका (सरकार) के दायरे में आता है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसे मुद्दों पर अदालतें फालतू आदेश जारी नहीं कर सकतीं।
जस्टिस ने कहा,अगर हम यह कहें कि अब कालाबाजारी या जमाखोरी नहीं होगी, तो क्या यह संभव है? उन्होंने आगे जोड़ा कि गरीबी मिटाना, सबको शिक्षा देना या एलपीजी सुनिश्चित करना जैसी बातें कार्यपालिका के क्षेत्र हैं। सरकार पहले से ही कुछ कदम उठा रही है, भले ही वे पर्याप्त हों या नहीं, लेकिन यह अदालत के दायरे से बाहर है।
जज ने कहा कि हम व्यर्थ में आदेश जारी नहीं कर सकते। कोर्ट ने जोर दिया कि एलपीजी संकट का समाधान प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर होना चाहिए, न कि न्यायिक हस्तक्षेप से। याचिका में कालाबाजारी और ऊंची कीमतों की शिकायत थी, लेकिन कोर्ट ने इसे कार्यपालिका की जिम्मेदारी बताते हुए खारिज कर दिया।
दिल्ली में हाल के समय में पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण एलपीजी आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कालाबाजारी और जमाखोरी की शिकायतें बढ़ी हैं। दिल्ली पुलिस ने ऐसे मामलों में कई छापेमारी की और एफआईआर भी दर्ज की हैं। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब एलपीजी संकट से निपटना पूरी तरह सरकार और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी रह गई है।










