लेंसकार्ट विवाद पर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का बयान सामने आया है। उन्होंने कंपनी की पॉलिसी पर विरोध जताते हुए कहा कि, ऐसे लोगों को अपनी कंपनी लाहौर में खोल लेनी चाहिए। बागेश्वर धाम के पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इस बयान के लिए सुर्खियों में है।
दरअसल, प्रयागराज में कथा का आयोजन हो रहा है। इस कथा के दौरान शास्त्री ने लेंसकार्ट विवाद पर टिप्पणी की। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए शास्त्री ने कहा कि, 'कंपनी अपने कर्मचारियों को तिलक, सिंदूर और मंगलसूत्र जैसे धार्मिक प्रतीक पहनने से रोकती है। कंपनी को लाहौर जाकर अपना कारोबार करना चाहिए।'
उन्होंने आगे कहा, "ठटरी के बरे! नक्कटा! तू अपनी कंपनी लाहौर में खोल ले, भारत में काहे मर रहा है? आगि के लगे! तेरो कक्का को भारत है का, हां! हमारे तो बाप का भारत भाई। हां, जिनको तिलक, चंदन, वंदन, राम से, श्याम से, हनुमान से, बाबा बागेश्वर से दिक्कत हो तो वो पतली गली से लाहौर खिसक लें।"
धीरेंद्र शास्त्री ने लेंसकार्ट वालों को लपेट दिया
— Rakesh 2.0 🇮🇳 (@TheRakesh_IND) April 22, 2026
जिन्हें चंदन स, तिलक से,कलावा से दिक्कत हो
वो ठठरी के बरे पतली गली से लाहौर निकल ले
नौकरी अपनी जगह पर धर्म से समझौता नहीं
जय हो बागेश्वर धाम सरकार 🚩🙏 pic.twitter.com/WlmA9jNhrf
हिन्दू एकता का परिचय दें
"आज उन्होंने तुम्हारे मंगलसूत्र पर ऊंगली उठाई, तिलक पर ऊंगली उठाई, कल तुम्हारी बिरादरी पर ऊंगली उठाएंगे, तुम्हारे सनातन पर उंगली उठाएंगे, तुम्हारे बच्चों पर उंगली उठाएंगे। अगर हम एकजुट नहीं हुए तो वो कल हमारी गीता-रामायण पर भी उंगलियां उठाएंगे। हम सभी को संगम से एक बात सीखनी है, जैसे संगम में तीन नदियां मिलकर महासंगम बनता है। ऐसे ही हम सभी जातियों को छोड़कर हिन्दू होकर एकता का परिचय दें।"
क्या है लेंसकार्ट से जुड़ा विवाद
लेंसकार्ट से जुड़ा विवाद सोशल मीडिया पर शुरू हुआ था। कंपनी पर धार्मिक भेदभाव के आरोप लगे थे। इसके चलते कंपनी को सफाई देनी पड़ी थी। लेंसकार्ट का कहना था कि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पॉलिसी पुरानी है और मौजूदा गाइडलाइंस को नहीं दर्शाती। पुरानी पॉलिसी में बिंदी, तिलक, सिंदूर या कोई अन्य धार्मिक प्रतीक लगाने की इजाजत नहीं थी।
हालांकि Lenskart के कर्मचारियों के लिए जारी किए गए नए स्टाइल गाइड में साफ-सुथरा दिखने से जुड़े ज्यादातर नियम पहले जैसे ही थे लेकिन कुछ अहम बदलाव भी किए गए थे। जहां पुराने गाइड में बिंदी लगाने पर रोक थी, वहीं नए गाइड में अब "धार्मिक, सांस्कृतिक या पारिवारिक निशान (जैसे बिंदी, तिलक, सिंदूर या कोई अन्य" लगाने की इजाजत है।
पुराने गाइड में कलावा पहनने पर भी रोक थी। हालांकि, नए गाइड में अब "सांस्कृतिक या धार्मिक चीजें, जैसे पवित्र धागे, चूड़ियां, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा या कोई अन्य चीज" पहनने की इजाजत है। जो कर्मचारी हिजाब पहनना चाहते हैं, वे पहले की तरह ही हिजाब पहन सकते हैं।









