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12 साल पहले रायपुर मेडिकल कॉलेज से बनी थीं हड्डी रोग विशेषज्ञ, अभी जशपुर में सेवाएं दे रहीं। 

विकास शर्मा- रायपुर।  12 साल पहले रायपुर मेडिकल कॉलेज से बनी थीं हड्डी रोग विशेषज्ञ, अभी जशपुर में दे रहीं सेवाएं, इस बार शहर के एक निजी मेडिकल कॉलेज में आर्थो विभाग में एक महिला डॉक्टर ने लिया पीजी में एडमिशन छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश में महिला आर्थोपेडिक सर्जनों की संख्या बेहद कम है। ऑल इंडिया आर्थोपेडिक एसोसिएशन में हड्डी रोग विशेषज्ञों की कुल संख्या 17 हजार से अधिक है, लेकिन इनमें महिला डॉक्टरों की संख्या मात्र 260 है। लेकिन छत्तीसगढ़... हमारे प्रदेश में केवल एक ही महिला आर्थोपेडिक सर्जन है।

प्रदेश में स्थिति और भी सीमित है। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में केवल एक महिला आर्थोपेडिक सर्जन कार्यरत हैं। लगभग 12 साल पहले रायपुर के शासकीय मेडिकल कॉलेज से डॉ. मधुलिका श्रीवास्तव ने अस्थि रोग विशेषज्ञ के रूप में अपनी पढ़ाई पूरी की थी और फिलहाल जशपुर जिले में अपनी सेवाएं दे रही हैं। अब एक दशक बाद इस क्षेत्र में एक नई उम्मीद जगी है। रायपुर के एक निजी मेडिकल कॉलेज में इस वर्ष एक महिला डॉक्टर ने पीजी में आर्थोपेडिक विभाग में एडमिशन लिया है, जिससे आने वाले समय में प्रदेश में महिला आर्थोपेडिक सर्जनों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

कठिन और चुनौतीपूर्ण माना जाता है क्षेत्र
हड्डी रोग विशेषज्ञ बनने का रास्ता काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इस क्षेत्र में सर्जरी के दौरान ज्यादा शारीरिक मेहनत और तकनीकी कौशल की जरूरत होती है। खींचतान, भारी उपकरणों का इस्तेमाल और लंबे ऑपरेशन की वजह से कई महिला डॉक्टर इस विषय को चुनने से हिचकिचाती हैं। यही कारण है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी आर्थोपेडिक सर्जनों की संख्या ज्यादा होने के बावजूद महिला डॉक्टरों की भागीदारी बेहद कम है।

चुनौती स्वीकार कर बनाया रास्ता
डॉ. मधुलिका श्रीवास्तव (जिला अस्पताल जशपुर) ने बताया कि पढ़ाई के दौरान उन्हें सर्जरी में विशेष रुचि थी। शुरुआत में उनके फैसले का विरोध भी हुआ, लेकिन उन्होंने चुनौती स्वीकार की। उनके अनुसार अस्थि रोग के इलाज में ड्रिलर, कटर जैसे औजारों का इस्तेमाल होता है और कई बार खून तथा जटिल परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि कई लोग इस विषय को चुनने से हिचकते हैं, लेकिन अगर रुचि हो तो यह क्षेत्र बेहद संतोष देने वाला है।

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