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Women's Day 2026 Special: अगर कुछ कर दिखाने का जज्बा और अथक परिश्रम की हिम्मत हो तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती। इसी सच्चाई को साबित करती हैं, देश-विदेश की ये वयोवृद्ध महिलाएं।

International Women's Day 2026 Special: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के मौके पर हम उन महिलाओं की कहानियों को सलाम कर रहे हैं, जिन्होंने अपने जोश, हिम्मत और आत्मविश्वास से उम्र और परिस्थितियों की सीमाओं को तोड़ दिया। ये महिलाएं सिर्फ प्रेरणा का स्रोत नहीं हैं, बल्कि यह साबित करती हैं कि शक्ति, साहस और जुनून किसी भी उम्र या हालात की मोहताज नहीं होते।

चाहे वह 94 साल की मॉडल कारमेन डेल ओरेफिस हों, 87 साल की बाइकर दादी मंदाकिनी या 97 साल की पार्करनर ग्रेस चेंबर्स, इन महिलाओं ने साबित कर दिया है कि उम्र केवल एक नंबर है। इनके अद्भुत कारनामे दिखाते हैं कि इच्छाशक्ति और मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

इस महिला दिवस पर आइए जानें उन प्रेरणादायक महिलाओं की कहानियां, जिन्होंने साहस और जोश के दम पर इतिहास रचा और दूसरों के लिए मिसाल कायम की।

जोश-हिम्मत की मिसाल हैं ये महिलाएं

कारमेन डेल ओरेफिस: आमतौर माना जाता है कि ग्लैमर वर्ल्ड में 40-45 की उम्र के बाद स्कोप नहीं रह जाता है। लेकिन 94 वर्षीय अमेरिकन मॉडल-एक्ट्रेसकारमेन डेल ओरेफिस ने इस सोच को गलत साबित कर दिया है। वे इस उम्र में भी मॉडलिंग कर रही हैं। वे सबसे उम्रदराज मॉडल हैं और उनकी भारी मांग है। वर्ष 1945में जब वे केवल 14 साल की थीं तो उन्होंने मॉडलिंग करनी शुरू कर दी थी।

मात्र 15 साल की उम्र में वर्ष 1946 में उनकी तस्वीर वोग पत्रिका के कवर पर प्रकाशित हुई थी। वर्ष 2023 में जब वे 91 साल की हुईंतो एक बार फिर वेवोग पत्रिका के चेक एडिशन केकवर पर नजर आईं। उन पर एक किताब भी प्रकाशित हुई है। इस किताब का नाम है,‘कारमेन डेल ओरेफिसः दअल्टीमेट रोल मॉडल।’ इस किताब को फोटोग्राफर फादिल बेरोशा ने प्रकाशित किया है। वे कारमेन के साथ 30 सालोंसे काम कर रहे हैं। कारमेन कहती हैं कि वे अपनी बढ़ती उम्र को छिपाने का प्रयासनहीं करती हैं। उनका दर्शन है कि बस निरंतर चलते रहो और अपना काम करते रहो। 

बाइकर दादी मंदाकिनी: हिंदी फिल्म ‘शोले’ में दो दोस्तों जय-वीरू की जोड़ी को लोग आज भी याद करते हैं। जय-वीरू की तरह ही मंदाकिनी और उनकी छोटी बहन उषा की जोड़ी भी है।अंतर इतना है कि मंदाकिनी की उम्र 87 साल है। वह ‘शोले’ फिल्म की स्टाइल में अपनी छोटी बहन 84 वर्षीय उषा के साथ अहमदाबाद की सड़कों पर अकसर स्कूटर राइडिंग करती नजर आ जाती हैं।

उनका कहना है कि उन्हें अपनी बढ़ती उम्र का अहसास ही नहीं होता। जब वे स्कूटर लेकर निकलती हैं औरहवा के झोंके उनके चेहरे को छूते हैं, तो वे स्वयं को 16 साल की लड़की जैसा महसूस करती हैं। बाइकर दादी के नाम से मशहूर मंदाकिनी, परिवार में पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं। उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी थे। बचपन में घर में आर्थिक तंगी का माहौल था। इसलिए 16 साल की उम्र में ही स्कूल टीचर बन गईं। उसके बाद वह सोशल वेलफेयर प्रोजेक्ट्स से भी जुड़ीं। आज मंदाकिनी जब अपनी बहन के साथ सड़कों पर स्कूटर दौड़ाती हैं तो उन्हें ऐसालगता है कि मानो यही जिंदगी का सबसे बड़ा सुख है। वे कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।

ग्रेस चेंबर्स: जहां पचास साल की आयु पार करने के बाद अधिकांश लोग स्वयं को वृद्ध समझकर हार मानकर बैठजाते हैं, वहीं कुछ व्यक्ति उम्र को केवल नंबर मानकर इतिहास रच देते हैं। 97 साल की ब्रिटिश महिला ग्रेस चेंबर्स भी उन्हीं में से एक हैं। उन्होंने 250 पार्करन पूरा करने का कठिनलक्ष्य हासिल किया है। ऐसा करके वे यूरोप की सबसे वृद्ध पार्करनर बन गई हैं। पार्करनर वह होता है, जो पार्करन इवेंट में भागलेता है और इसे सफलतापूर्वक पूरा करता है।

यह 5 किमी. का सामुदायिक रनिंग कार्यक्रम है। यह हर शनिवार को विश्व भर के 22 से अधिक देशों में आयोजित किया जाता है। 250 रनिंग इवेंट में हिस्सा लेने पर हरे रंग की एक खास टी-शर्ट मिलती है। ग्रेस ने इस सम्मान को हासिल कर सबको चौंका दिया है। 9 साल पहले अपनी बेटी की चुनौती पर पहली बार पार्करन में हिस्सा लिया था। इससे पहले वह एक पर्वतारोहीभी रह चुकी हैं। 
 

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