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मोहला जिले के अंबागढ़ चौकी केंद्रीय एकलव्य आवासीय विद्यालय में छात्राओं द्वारा आत्महत्या की कोशिशों का मामला विधानसभा के बजट सत्र में गूंजने वाला है।

एनिशपुरी गोस्वामी- मोहला। अंबागढ़ चौकी नगर में संचालित केंद्रीय एकलव्य आवासीय विद्यालय में मासूम छात्राओं के एक के बाद एक आत्महत्या करने के प्रयास और बालकों के साथ बेरहमी से मारपीट का मामला अब अनुसूचित जनजाति आयोग और विधानसभा तक पहुंचने वाला है।

उल्लेखनीय है कि, एकलव्य आवासीय विद्यालय में आदिवासी छात्रों के साथ बर्बरता किये जाने और नाबालिग छात्राओं के द्वारा एक के बाद एक आत्मघाती कदम उठाने के मामले को एकलव्य परिसर के भीतर आदिम जाति कल्याण विभाग और स्कूल प्रशासन द्वारा दबाने का प्रयास किया जा रहा था। 

जांच हुई पर रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई
इस संवेदनशील घटना पर हरिभूमि में प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बाद कलेक्टर तूलिका प्रजापति के निर्देश पर अपर कलेक्टर जीआर मरकाम की अध्यक्षता में डिप्टी कलेक्टर शुभांगी गुप्ता, एसडीएम हेमेंद्र भूआर्य, अंबागढ़ चौकी तहसीलदार अनुरिमा टोप्पो, आरआई तामेश्वरी इस्दा, एसडीओपी नेहा पवार की टीम ने जांच कर फाइल तैयार की है। परंतु जांच किस हद तक पारदर्शी है, मामले में कौन-कौन दोषी हैं? क्या कार्रवाई दोषी शिक्षकों पर तय की जा रही है? इसका आता पता नहीं है। 

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Collector Office Mohla
Collector Office Mohla

अनुसूचित जनजाति आयोग ने लिया संज्ञान 
इधर हरिभूमि की खबर पर राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग ने संज्ञान में लेते हुए जिला प्रशासन से जवाब मांगा है। वहीं खुज्जी विधानसभा क्षेत्र के विधायक भोलाराम साहू ने एक के बाद एक बच्चियों की खुदकुशी करने के प्रयास और बेरहमी से छात्रों को मारने के मामले पर विधानसभा में प्रश्न लगाया है।

इन विषयों के टीचरों पर है मारपीट का आरोप
प्रशासनिक जांच में अधिकारियों ने बताया कि, केंद्रीय विद्यालय एकलव्य में पदस्थ बाहर प्रदेश के शिक्षक पीटीआई आकाश शर्मा, फिजिक्स के लेक्चरर अनिल, हिंन्दी के लेक्चरर पर्वत को मारपीट मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। बच्चों ने इनके द्वारा मारपीट करने की शिकायत की पुष्टि की है।

क्यों जान देने पर उतारू हुईं बच्चियां, इस पर अब भी पर्दा
नाबालिग छात्रों से बर्बरता का मामला अब लगभग दब गया है। इसमें अब तक कोई भी एक्शन नहीं लिया गया है। इधर मासूम बच्चियां क्यों एक के बाद एक जान देना चाह रही थीं? इसकी निष्पक्ष जांच के नाम पर बेहद शंसय की स्थिति बनी हुई है।

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