अनिल सामंत- जगदलपुर। शहर के प्रतापदेव वार्ड में सरकारी क्वार्टर तोड़े जाने के बाद से विवादों में घिरी जमीन एक बार फिर सुर्खियों में है। पहले यहां मल्टी स्टोरी पार्किंग बनाने की योजना बनी, डीपीआर भी तैयार हुई, लेकिन कोरोना काल में मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद जमीन दिगम्बर समाज को मंदिर निर्माण के लिए दिए जाने की चर्चाओं ने सियासी पारा चढ़ा दिया। मेन रोड व्यापारियों और कांग्रेस द्वारा विरोध प्रदर्शन के बाद यह मुद्दा और गरमा गया।
सूअर की बलि दी गई और उक्त संपत्ति को बताया पैतृक
इसी बीच भूमकाल स्मृति दिवस पर निकली मूलनिवासी समाज की रैली जब इस स्थल पर पहुंची तो घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। समाज के लोगों ने पारंपरिक जात्रा की रस्म अदा करते हुए सूअर की बलि दी और भूमि को अपनी पैतृक संपत्ति बताते हुए दावा पेश किया। उनका कहना है कि यह जमीन ऐतिहासिक रूप से जगतू माहरा की रही है और मूल निवासियों की धरोहर है।

हस्तक्षेप होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
मूलनिवासी पदाधिकारियों ने घोषणा की है कि, यहां “बस्तरिया भवन” का निर्माण किया जाएगा। जिससे बस्तर दशहरा जैसे आयोजनों में बाहर से आने वाले लोगों को ठहरने की सुविधा मिल सके। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि शासन-प्रशासन को कई बार पत्र देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। चेतावनी दी गई कि, हस्तक्षेप होने पर उग्र आंदोलन किया जाएगा।

विवाद की पूरी पृष्ठभूमि क्रमबद्ध रूप में
प्रतापदेव वार्ड की जमीन पर पहले जर्जर सरकारी क्वार्टर थे जिन्हें तोड़ा गया, इसके बाद मल्टी स्टोरी पार्किंग की योजना बनी और डीपीआर तैयार हुई, लेकिन कोरोना काल में योजना स्थगित हो गई। बाद में दिगम्बर समाज को मंदिर निर्माण के लिए जमीन दिए जाने की चर्चा सामने आई, जिस पर व्यापारियों और कांग्रेस ने विरोध किया, अब भूमकाल स्मृति दिवस पर मूलनिवासी समाज ने पारंपरिक जात्रा और बलि प्रथा के माध्यम से भूमि पर दावा जताते हुए बस्तरिया भवन निर्माण की घोषणा कर दी है,जिससे मामला प्रशासनिक और सियासी स्तर पर फिर संवेदनशील हो गया है।









