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बेमेतरा जिले के रानो स्कूल में अक्ति तिहार धूमधाम से मनाया गया, जहां बच्चों ने चुलमाटी, हल्दी और गुड्डा-गुड़िया विवाह की पारंपरिक रस्मों के जरिए संस्कृति को जीवंत किया।

बेमेतरा। छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करते हुए साजा विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रानो में अक्ति तिहार बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर बच्चों की खुशियों, पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक गतिविधियों से सराबोर नजर आया।

पारंपरिक विवाह की झलक
नवाचारी शिक्षिका प्रतीक जैन के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने पारंपरिक विवाह की झलक पेश करते हुए चुलमाटी, हल्दी और पुतरा-पुतरी (गुड्डा-गुड़िया) के विवाह की रस्मों को बेहद आकर्षक तरीके से निभाया। कार्यक्रम की शुरुआत चुलमाटी से हुई, जहां बच्चे सामूहिक रूप से पूजा स्थल पर पहुंचे, दीप प्रज्वलित कर पूजा-अर्चना की और पवित्र मिट्टी लेकर विद्यालय लौटे।

Akti Tiharपारंपरिक रस्मों का देखने मिला संगम
इसके बाद हल्दी की रस्म निभाई गई, जिसमें बच्चों ने गुड्डा-गुड़िया के साथ-साथ एक-दूसरे को भी हल्दी लगाकर उत्सव का आनंद लिया। तत्पश्चात पूरे विधि-विधान से पुतरा-पुतरी का विवाह कराया गया, जिसमें टिकावन (टीका) की रस्म भी निभाई गई। बच्चों ने इस आयोजन के माध्यम से पारंपरिक रीति-रिवाजों को न केवल सीखा बल्कि उन्हें जीवंत रूप में अनुभव भी किया।

समृद्धि और सौभाग्य का पर्व
प्रतीक जैन ने बताया कि, अक्ति तिहार, जिसे अक्षय तृतीया के नाम से भी जाना जाता है, छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख पारंपरिक पर्व है। यह वैशाख शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है और इसे नए कृषि सत्र की शुरुआत, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इस दिन मिट्टी के गुड्डे-गुड़ियों का विवाह, कृषि उपकरणों की पूजा और माटी पूजन की परंपरा विशेष महत्व रखती है। मान्यता है कि इस दिन आरंभ किया गया कार्य अक्षय फल प्रदान करता है।

Akti Tiharये लोग रहे उपस्थित
इस सांस्कृतिक आयोजन में प्रभारी प्राचार्य द्वारिका राम वर्मा, प्रधान पाठक किशुनराम साहू, उत्तम साहू, अवधराम वर्मा, कनकलता सरसुधे, प्रज्ञा जैन, दीनदयाल वर्मा, अमृत लाल गुप्ता सहित विद्यालय के शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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