रायपुर। छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों की निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के पारिवारिक रिश्तेदार-नातेदार अब उनके प्रॉक्सी प्रतिनिधि या लायजन पर्सन के रूप में काम नहीं कर सकेंगे। राज्य सरकार के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इनकी नियुक्ति पर रोक का आदेश जारी किया है। यही नहीं, निकायों से यह ब्योरा भी मांगा गया है कि किस महिला प्रतिनिधि के रिश्तेदार यह काम कर रहे हैं।
अब बताओ कितने रिश्तेदार हैं प्रतिनिधि
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी नगरीय निकायों को एक प्रोफार्मा भेजकर रिश्तेदारी में बने प्रतिनिधियों का ब्योरा कुछ बिंदुओं के आधार पर मांगा है। जिले और निकाय के नाम के साथ सासंद और विधायक द्वारा नियुक्त प्रतिनिधि का नाम, यह भी बताना होगा कि नगर निगम, पालिक व नगर पंचायत के महापौर, सभापति, अध्यक्ष या पार्षद के पारिवारिक सदस्य रिश्तेदार हैं या नहीं। यदि रिश्तेदार हैं को किस महिला प्रतिनिधि के रिश्तेदार है, उनका नाम और पदनाम भी बताना होगा।
अब जारी हुआ ये आदेश
इस संबंध में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के रिश्तेदारों की प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त पर रोक लगाने का आदेश दिया है। यह आदेश राज्य के सभी नगर निगम आयुक्त, पालिकाओं और नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को भेजा गया है।
ये है मामला
राज्य शासन ने यह आदेश दरअसल इसलिए जारी किया है क्योंकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने प्रदेश के नगरीय निकायों में सांसद, विधायकों द्वारा निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के पारिवारिक रिश्तेदार-नातेदार को प्रॉक्सी प्रतिनिधि या लाजयन पर्सन नियुक्त किए जाने पर भारतीय संविधान का उल्लंघन माना है। यही नहीं आयोग ने इस तरह के मामलों में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई का उल्लेख भी किया है। नगरपालिक अधिनियम में यह प्रावधान है कि सांसद-विधायकों द्वारा नगरीय निकायों में अपने प्रतिनिधि नियुक्त किए जाते हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग का कहना है उनके संज्ञान में यह लाया गया है कि कतिपय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के पारिवारिक रिश्तेदार-नातेदार को प्रॉक्सी प्रतिनिधि, लायजन पर्सन के रूप में नियुक्त किया जा रहा है।
16 साल पहले जारी हुआ था ये आदेश अब से 16 साल पहले यानि वर्ष
2010 में छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इस संबंध में एक आदेश जारी किया था। इस आदेश के निर्वाचित महिला पदाधिकारियों के कामकाज के संचालन के दौरान उनके सगे संबंधियों के हस्तक्षेप को प्रतिबंधित किया गया था। कहा गया था कि निकायों के कामकाज, बैठक आदि में महिला पदाधिकारी के कोई संबंधी रिश्तेदार भाग नहीं लेंगे और न ही हस्तक्षेप दखलंदाजी करेंगे। और न ही किसी विषय पर किसी भी पदाधिकारी, कर्मियों को महिला पदाधिकारी की ओर से निर्णय लेकर सूचित करेंगे। इस तरह के मामलों में कार्रवाई के लिए कहा गया था। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बार मानवाधिकार आयोग ने इसे संविधान के खिलाफ बताते हुए कार्रवाई के लिए भी कहा है।











