गोरखपुर : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित 'जनता दर्शन' के दौरान सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि जो अधिकारी मामलों के निस्तारण में लापरवाही बरतेंगे या जनता को गुमराह करने के लिए गलत रिपोर्ट लगाएंगे, उन्हें न केवल निलंबित किया जाएगा बल्कि उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
लापरवाही करने वाले अफसरों पर गिरेगी गाज
जनता दर्शन में करीब 500 से अधिक फरियादियों की समस्याएं सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि "आम जनता की पीड़ा के प्रति संवेदनहीनता क्षमा योग्य नहीं है।
मुख्यमंत्री के पास ऐसी शिकायतें पहुँची थीं जिनमें जिला स्तर के अधिकारियों ने मामलों का निस्तारण किए बिना ही फाइलों पर 'निस्तारित' की फर्जी रिपोर्ट लगा दी थी। सीएम ने निर्देश दिया कि ऐसे मामलों की पहचान कर दोषियों को चिह्नित किया जाए।
"हर पीड़ित की समस्या का हो गुणवत्तापूर्ण समाधान"
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि:-
केवल कागजों पर खानापूर्ति न करें, बल्कि मौके पर जाकर यह सुनिश्चित करें कि पीड़ित को न्याय मिला है या नहीं।
हर आवेदन पर निर्धारित समय के भीतर कार्रवाई होनी चाहिए।
किसी भी स्तर पर धन उगाही या बिचौलियों की संलिप्तता पाई गई, तो संबंधित अधिकारी को सीधा जिम्मेदार माना जाएगा।
भूमि विवाद और सुरक्षा के सख्त निर्देश
जनता दर्शन में सबसे अधिक मामले पुलिस और भूमि विवाद से संबंधित थे। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को हिदायत दी कि वे माफियाओं और दबंगों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएं।
उन्होंने कहा कि किसी भी गरीब की जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों के साथ कोई नरमी न बरती जाए। साथ ही, उन्होंने गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए सहायता मांगने आए लोगों को आश्वस्त किया कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा और अधिकारियों को तुरंत एस्टीमेट बनाने के निर्देश दिए।
प्रशासनिक सतर्कता और जवाबदेही
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शासन की मंशा बहुत साफ है—हर नागरिक को न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि तहसील और जिला स्तर पर ही समस्याओं का समाधान होना चाहिए ताकि लोगों को लखनऊ तक न दौड़ना पड़े। जो अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से भागेंगे, उनका स्थान जेल भी हो सकता है।











