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15 फरवरी से ही पुलिसकर्मी हाथ जोड़कर और मुस्कान के साथ भक्तों का स्वागत करेंगे। सुरक्षा के लिए ड्रोन और सीसीटीवी की मदद ली जा रही है, जबकि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चप्पे-चप्पे पर सहायता केंद्र बनाए गए हैं।

वाराणसी : मोक्ष की नगरी काशी में इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व (15-16 फरवरी 2026) अभूतपूर्व होने जा रहा है। बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए लाखों श्रद्धालुओं का रेला काशी पहुंचने लगा है। इस बार प्रशासन और पुलिस ने न केवल सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं, बल्कि श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए 'अतिथि देवो भव' की भावना के साथ विशेष तैयारियां की हैं।

​हाथ जोड़कर और मुस्कान के साथ स्वागत करेगी वाराणसी पुलिस

​वाराणसी के पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि महाशिवरात्रि पर काशी आने वाले हर श्रद्धालु का स्वागत पुलिस हाथ जोड़कर करेगी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मी केवल रक्षक नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और सहायक की भूमिका में नजर आएंगे।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 'पुलिस सहायता केंद्र' स्थापित किए गए हैं, जहाँ मुस्कुराते हुए पुलिसकर्मी लोगों की मदद करेंगे। सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है।

​15 फरवरी से ही जुटने लगेगी लाखों की भीड़

​महाशिवरात्रि का मुख्य पर्व 16 फरवरी को है, लेकिन श्रद्धालुओं का आगमन 15 फरवरी से ही शुरू हो जाएगा। अनुमान है कि इस बार काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन करने वालों की संख्या पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ देगी।

इसके मद्देनजर गोदौलिया, मैदागिन और दशाश्वमेध घाट क्षेत्रों में यातायात डायवर्जन लागू कर दिया गया है। भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए होल्डिंग एरिया और बैरिकेडिंग की विशेष व्यवस्था की गई है ताकि कतारें व्यवस्थित रहें।

​हल्दी की रस्म और बाबा का विशेष श्रृंगार

​महाशिवरात्रि से पहले काशी में उत्सव का माहौल है। बाबा विश्वनाथ के विवाह की रस्में शुरू हो चुकी हैं। परंपरा के अनुसार, बाबा का रूप हल्दी के रंग से निखारा गया है। औघड़दानी के इस मनमोहक स्वरूप के दर्शन के लिए मंदिरों में विशेष भीड़ उमड़ रही है। भक्तों में भारी उत्साह है कि वे अपने आराध्य के विवाह उत्सव का साक्षी बनें।

​52 थाल चढ़ावा

​काशी की गलियों में 'बम-बम भोले' के जयकारे गूंज रहे हैं। श्रद्धालु अपनी मन्नतें और खुशियाँ साझा करने के लिए बाबा के दरबार में 52 थाल विशेष चढ़ावा लेकर पहुँच रहे हैं। इसमें फल, मेवे, मिष्ठान और बाबा की प्रिय वस्तुएं शामिल हैं। चढ़ावे की यह भव्यता दिखाती है कि भक्तों की आस्था बाबा के प्रति कितनी अगाध है।

​गंगा घाटों पर सुरक्षा और जल पुलिस की मुस्तैदी

​महाशिवरात्रि के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इसे देखते हुए दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट और मणिकर्णिका घाट पर जल पुलिस और गोताखोरों की तैनाती की गई है। गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई है। एनडीआरएफ की टीमें भी अलर्ट पर हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

​सुगम दर्शन की व्यवस्था

​काशी विश्वनाथ न्यास ने श्रद्धालुओं के लिए सुगम दर्शन की भी व्यवस्था की है। दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए व्हीलचेयर और विशेष स्वयंसेवकों की नियुक्ति की गई है। दर्शन की कतारों में पीने के पानी और चिकित्सा शिविरों का प्रबंध किया गया है ताकि लंबी लाइनों में खड़े भक्तों को असुविधा न हो।

​यातायात प्रतिबंध और पार्किंग के इंतजाम

​15 फरवरी की रात से ही शहर के मुख्य मंदिरों की ओर जाने वाले मार्गों पर वाहनों का प्रवेश वर्जित रहेगा। श्रद्धालुओं की गाड़ियों के लिए शहर के बाहरी हिस्सों में बड़े पार्किंग स्थल बनाए गए हैं, जहाँ से मंदिर तक पहुँचने के लिए शटल बस सेवा उपलब्ध कराई जा सकती है।

​होटलों और धर्मशालाओं में भारी बुकिंग

​महाशिवरात्रि के मद्देनजर काशी के लगभग सभी होटल, गेस्ट हाउस और धर्मशालाएं फुल हो चुके हैं। प्रशासन ने होटल मालिकों को निर्देश दिए हैं कि वे आने वाले मेहमानों के साथ उचित व्यवहार करें और किसी भी प्रकार की ओवरचार्जिंग न करें।

 

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