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बस्तर की पावन धरा वैश्विक खेल मानचित्र पर अपनी अमिट छाप छोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। 

जगदलपुर। बस्तर की पावन धरा वैश्विक खेल मानचित्र पर अपनी अमिट छाप छोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। 22 मार्च को आयोजित होने वाली 'बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026' केवल एक क्षेत्रीय खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं और स्थानीय संस्कृति का एक भव्य संगम बनने जा रही है। इस वर्ष के आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता विदेशी धावकों की उत्साहजनक भागीदारी है, जो बस्तर की सड़कों पर अपनी रफ्तार का जलवा बिखेरेंगे। 

अब तक हुए 5000 से अधिक कुल पंजीकरणों में 68 विदेशी धावकों का शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि बस्तर की यह दौड़ अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है। विशेष रूप से लंबी दूरी की दौड़ के लिए दुनिया भर में मशहूर इथोपिया के 42 और केन्या के 26 मंझे हुए एथलीट्स की मौजूदगी ने इस मुकाबले को बेहद रोमांचक और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। इस महाकुंभ का मुख्य आकर्षण 42 किलोमीटर की 'फुल मैराथन' होगी। यह ऐतिहासिक सफर जगदलपुर के लालबाग मैदान से शुरू होकर 'भारत के नियाग्रा' कहे जाने वाले विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात के तट पर संपन्न होगी।

विश्व पटल पर बस्तर की छवि को मजबूती से प्रस्तुत करेगीः छिकारा
बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा ने विदेशी मेहमानों और अन्य क्षेत्रों के धावकों का स्वागत करते हुए सभी से अपील की है कि वे आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन नंबर के माध्यम से इस ऐतिहासिक दौड़ का हिस्सा बनें। यह मैराथन न केवल खेलभावना को बढ़ावा देगी, बल्कि विश्व पटल पर बस्तर की एक नई, शांतिप्रिय और साहसी छवि को भी मजबूती से प्रस्तुत करेगी।

सुकमा जिले के 30 समर्पित नक्सली लेंगे भाग
बस्तर हेरिटेज मैराथन में सुकमा जिले के नक्सल पुनर्वास केंद्र के 30 पुनर्वासित युवाओं का इस मैराथन में भाग लेना एक प्रेरणादायक कदम है। यह केवल दौड़ नहीं, बल्कि उन युवाओं की नई शुरुआत का प्रतीक है, जिन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का साहसिक निर्णय लिया है। प्रशासन द्वारा उन्हें प्रशिक्षण देना, उनकी प्रतिभा को मंच देना और समाज से जोड़ना यह दर्शाता है कि सरकार केवल योजनाएं नहीं बनाती, बल्कि उन्हें जमीन पर प्रभावी रूप से लागू भी करती है।
 

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