रायपुर। शिक्षा के अधिकार कानून के तहत दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ाने से नाराज निजी स्कूलों ने अब असहयोग आंदोलन का निर्णय लिया है। निजी स्कूल संघ का कहना है, जब तक स्कूल शिक्षा विभाग शिक्षा के अधिकार कानून के अंतर्गत प्रदान दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ाता तब तक प्रदेश के समस्त स्कूल असहयोग आंदोलन करेंगे। असहयोग आंदोलन उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन तक जारी रहेगा।
गौरतलब है, आरटीई राशि नहीं बढ़ाने के खिलाफ निजी स्कूलों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसके पश्चात आरटीई राशि में उचित वृद्धि करने आदेश दिए गए थे। इसके बाद भी स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इस दिशा में किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से आरटीई शुल्क में वृद्धि की मांग निजी स्कूल संघ कर रहे हैं। वर्तमान में आरटीई के अंतर्गत प्रति छात्र निजी स्कूलों को 7 हजार रुपए शासन द्वारा दिए जाते हैं। अब इसे बढ़ाकर 18 हजार करने की मांग स्कूल संघ ने की है।
आरटीई सत्यापन नहीं
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन की प्रदेश कार्यकारिणी द्वारा यह फैसला एक मार्च को हुई बैठक में लिया गया है। निजी स्कूल संघ ने कहा, असहयोग आंदोलन में स्कूल शिक्षा विभाग, जिला शिक्षा अधिकारी अथवा नोडल प्राचार्य के किसी भी कार्य में प्रदेश के निजी स्कूल सहयोग नहीं करेंगे। इसके अलावा उनके किसी पत्र, नोटिस अथवा आदेश का जवाब नहीं दिया जाएगा। संघ के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा, गरीब विद्यार्थियों की शिक्षा पर होने वाले व्यय पर स्कूल शिक्षा विभाग संवेदनहीन है। न्यायालय के आदेश की भी अनदेखी की जा रही है। संगठन के समस्त स्कूल आरटीई के तहत प्राप्त आवेदनों के सत्यापन कार्य में हिस्सा नहीं लेंगे। प्रदेश के 20 जिला संगठनों द्वारा भी अपने अपने जिलों में असहयोग आंदोलन के लिए पत्र सम्बंधित जिला शिक्षा अधिकारियों को सौंपे जा चुके हैं।










