कुश अग्रवाल- बलौदाबाजार। होली की आहट के साथ ही जहां बाजार रंग-बिरंगे गुलाल और पिचकारियों से सज गए हैं। वहीं इस बार बलौदाबाजार जिले में होली का रंग कुछ खास है। यहां रंगों का उत्सव सिर्फ खुशियों तक सीमित नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का संदेश भी दे रहा है। जिले की महिलाएं प्राकृतिक फूलों और सब्जियों से हर्बल गुलाल तैयार कर ‘ग्रीन होली’ की नई मिसाल पेश कर रही हैं।
रंगों के पर्व होली की बयार चारों ओर बह रही है। बाजारों में रौनक है, लेकिन इस बार सबसे ज्यादा मांग हर्बल गुलाल की देखी जा रही है। पलारी विकासखंड के ग्राम धमनी में वैष्णवी स्व सहायता समूह की महिलाएं पूरी तरह प्राकृतिक सामग्री से गुलाल बना रही हैं। महिलाएं पलाश के फूलों से गुलाबी रंग, गेंदे के फूलों से पीला रंग, पालक से हरा रंग, लालभाजी से लाल रंग तैयार कर रही हैं।
बलौदाबाजार जिले के पलारी विकासखंड के ग्राम धमनी में वैष्णवी स्व सहायता समूह की महिलाएं पलाश, गेंदा, पालक और लालभाजी से प्राकृतिक हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं। @BalodaBazarDist pic.twitter.com/NEobnGEn05
— Haribhoomi (@Haribhoomi95271) March 1, 2026
खुशबू के लिए ये चीजें होंगी इस्तेमाल
गुलाल बनाने की प्रक्रिया भी पूरी तरह पारंपरिक और सुरक्षित है। पहले फूलों और पत्तियों को इकट्ठा कर अच्छी तरह धोया जाता है, फिर धूप में सुखाया जाता है। सूखने के बाद मिक्सी में बारीक पीसकर उसमें अरारोट पाउडर मिलाया जाता है। खुशबू के लिए गुलाब जल और सुगंधित तेल डाला जाता है। पूरी प्रक्रिया महिलाओं द्वारा हाथों से की जाती है।
करीब तीन क्विंटल हर्बल गुलाल तैयार
सबसे खास बात यह है कि इस गुलाल में किसी भी प्रकार के रासायनिक तत्वों का उपयोग नहीं किया जाता। यह त्वचा के लिए सुरक्षित है और पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता। अब तक समूह की महिलाएं करीब तीन क्विंटल हर्बल गुलाल तैयार कर चुकी हैं और स्थानीय बाजारों में स्टॉल लगाकर इसकी बिक्री कर रही हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिला है और आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा है।
पूरी तरह प्राकृतिक फूलों से गुलाल बनाते हैं- दुर्गा ध्रुव
सहायता समूह की अध्यक्ष दुर्गा ध्रुव बताती हैं कि, हम लोग पूरी तरह प्राकृतिक फूलों से गुलाल बनाते हैं। इसमें कोई केमिकल नहीं होता, इसलिए यह त्वचा के लिए सुरक्षित है। इससे हमें रोजगार भी मिल रहा है। इस बार होली पर यदि आप भी रंग खरीदने जा रहे हैं, तो इन महिलाओं के हाथों से बने प्राकृतिक गुलाल को जरूर अपनाएं। यह सिर्फ रंग नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का संदेश है।








