कुश अग्रवाल - बलौदा बाजार। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत में लाल ईंटों से निर्मित प्राचीन मंदिरों की एक गौरवशाली परंपरा रही है। इन्हीं धरोहरों में विशेष स्थान रखता है पलारी का सिद्धेश्वर मंदिर, जो अपनी अनूठी वास्तुकला, धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन इतिहास के कारण प्रदेश के प्रमुख आस्था एवं पर्यटन स्थलों में शामिल है।
सिद्धेश्वर मंदिर का इतिहास और निर्माण शैली
7वीं-8वीं शताब्दी में निर्मित यह शिवधाम लाल ईंटों की परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। मंदिर पश्चिमाभिमुख है और इसकी वास्तु कला में नागर शैली की स्पष्ट छाप दिखाई देती है। प्रवेश द्वार पर देवी-देवताओं की बारीक नक्काशी और विशेष रूप से शिव-विवाह का उकेरा दृश्य प्राचीन शिल्प कौशल का अद्भुत प्रमाण है। दीवारों पर बनी विभिन्न देव प्रतिमाएं उस समय की उच्च कोटि की कला को दर्शाती हैं। इतिहासकार इसे सिरपुर के प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर की शैली से जुड़ी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।
8वीं शताब्दी में लाल ईंटों से निर्मित पलारी का सिद्धेश्वर मंदिर नागर शैली का अनूठा उदाहरण है, जो कला, इतिहास और आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।@BalodaBazarDist #Palari #SiddheshwarTemple pic.twitter.com/tuJGOdRByC
— Haribhoomi (@Haribhoomi95271) February 15, 2026
धार्मिक महत्व और लोकमान्यताएं
मंदिर में भगवान शिव 'सिद्धेश्वर' रूप में विराजमान हैं। मान्यता है कि यहां की गई प्रार्थना अवश्य फलदायी होती है। इसी श्रद्धा के चलते दूर-दूर से भक्त यहां पहुंचकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। सावन, पौष पूर्णिमा और महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में हजारों श्रद्धालु उमड़ते हैं। महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा-अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और बड़े स्तर पर भंडारे का आयोजन होता है।
बालसमुंद तालाब: प्राकृतिक सौंदर्य का संगम
मंदिर के सामने लगभग 150 एकड़ में फैला बालसमुंद तालाब इस स्थल को और अधिक सुंदर बनाता है। यह तालाब धार्मिक दृष्टि के साथ-साथ पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है, जहां नौकायन की सुविधा भी उपलब्ध है। तालाब के नामकरण को लेकर प्रचलित जनश्रुति भी काफी रोचक है- कहा जाता है कि, निर्माण के दौरान तालाब में पानी नहीं भर रहा था, और नवजात शिशु को तालाब में रखने पर अचानक पानी प्रकट हुआ। तभी से इसका नाम बालसमुंद पड़ा।
संरक्षण व आसपास के प्रमुख स्थल
यह प्राचीन धरोहर वर्तमान में राज्य पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। मंदिर परिसर के पास राधा-कृष्ण, दुर्गा और राम-जानकी मंदिर स्थित हैं, जो इस क्षेत्र की धार्मिक महत्ता को और अधिक समृद्ध करते हैं। पलारी स्थित सिद्धेश्वर मंदिर न केवल आस्था का प्रमुख स्थान है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की प्राचीन वास्तुकला, इतिहास और लोकविश्वासों का जीवंत प्रतीक भी है। लाल ईंटों की अनूठी कलात्मक परंपरा को संजोए यह मंदिर आज भी प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को चमकदार बनाए हुए है।










