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छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने प्रदेश की चुनावी तस्वीर ही बदल दी है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने प्रदेश की चुनावी तस्वीर ही बदल दी है। ड्राफ्ट मतदाता सूची में 27.34 लाख नाम हटाए जाने के बाद अब तक मात्र 2.95 लाख लोगों ने ही दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया है। अब साफ है कि अंतिम सूची में 19 लाख से अधिक मतदाता कम हो सकते हैं।

एसआईआर से पहले प्रदेश में कुल 2,12,30,737 मतदाता दर्ज थे। 23 दिसंबर को प्रारंभिक प्रकाशन के साथ ही 27,34,817 नाम हटाए गए और मतदाताओं की संख्या घटकर 1,84,95,920 रह गई। अब तक मिले आवेदनों को जोड़ भी लिया जाए तो अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या लगभग 1.90 करोड़ के आसपास रहने का अनुमान है।

इस कारण से कटेंगे नाम
निर्वाचन विभाग के अनुसार 6.42.234 नाम मृतकों के थे, जिन्हें हटाया गया। करीब 1.75 लाख नाम दोहरी प्रविष्टि (डबल एंट्री) के कारण हटे। सबसे बड़ी संख्या 19,13540, ऐसे मतदाताओं की है, जो शिफ्ट हो चुके थे, पते पर उपलब्ध नहीं मिले या सत्यापन में अनुपस्थित रहे। एसआईआर के दौरान 6.13 लाख मतदाताओं तक बीएलओ पहुंच ही नहीं सके। कई पते पुराने निकले कुछ घरों पर ताला मिला तो कई मामलों में लोग दूसरे शहरों में जा चुके थे। नोटिस जारी हुए, लेकिन बड़ी संख्या में जवाब नहीं आया। प्रदेशभर में करीब 50 हजार लोग ही सुनवाई में उपस्थित हुए।

एआई की सख्ती में फंसे नाम
साफ्टवेयर और एआई आधारित जांच में छोटी-छोटी विसंगतियां भी पकड़ में आई। नाम में वर्तनी का अंतर, उपनाम गायब होना, एक ही परिवार के दो सदस्यों की एंट्री गड़बड़ होना। कई मतदाताओं के पास निर्धारित 13 में से कोई वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं था, जिससे सत्यापन नहीं हो पाया।

समयसीमा खत्म, अब अंतिम सूची का इंतजार
नाम जुड़वाने के लिए आवेदन की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है। फार्म-6 के तहत 25 लाख आवेदन ही आए, जो कटे हुए नामों का करीब 10-11 प्रतिशत है। ऐसे में यह लगभग तय है कि बड़ी संख्या में पुराने मतदाता अंतिम सूची से बाहर रह जाएंगे। 21 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी। राजनीतिक दलों और चुनावी विश्लेषकों की नजर अब इसी पर टिकी है, क्योंकि मतदाताओं की संख्या में यह बड़ा बदलाव आगामी चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।


 

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