Prashant Kishor's Bihar Yatra: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने एक बार फिर से जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है। रविवार, 8 फरवरी को उन्होंने पश्चिम चंपारण जिले के बगहा से अपनी 'बिहार नवनिर्माण यात्रा' की औपचारिक शुरुआत की।
पीके ने स्पष्ट किया कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य राज्य के हर जिले में जाकर जन सुराज के संगठन का पुनर्गठन करना और पार्टी की नींव को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत बनाना है। चुनाव के बाद यह उनका पहला बड़ा राजनीतिक कदम माना जा रहा है।
महिलाओं को 2-2 लाख देने की मांग
अपनी यात्रा के पहले दिन प्रशांत किशोर ने सीधे तौर पर केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को चुनाव से पहले किया गया 'महिला रोजगार योजना' का वादा याद दिलाया।
जन सुराज संगठन को मज़बूत करने और आगे की रणनीतियों पर संवाद!!
— Jan Suraaj (@jansuraajonline) February 8, 2026
📌बगहा-पश्चिम चंपारण pic.twitter.com/wDH62QeeKl
पीके ने कहा कि अगर एनडीए सरकार महिलाओं को 2-2 लाख रुपये देने की अपनी घोषणा को अमलीजामा नहीं पहनाती है, तो यह साफ हो जाएगा कि यह केवल वोट बटोरने का एक जरिया था। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर महिलाओं को यह राशि नहीं मिली, तो जन सुराज जनता के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन करेगी।
संगठन का होगा पुनर्गठन
प्रशांत किशोर ने मीडिया से बातचीत में अपनी रणनीति का खुलासा करते हुए कहा कि वे हर जिले का दौरा करेंगे। इस दौरान न केवल पुराने साथियों के साथ बैठकें होंगी, बल्कि समाज के नए और ऊर्जावान लोगों को भी जन सुराज पार्टी के साथ जोड़ा जाएगा।
उनका लक्ष्य पार्टी के ढांचे को नए सिरे से तैयार करना है ताकि भविष्य की चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया जा सके। पीके ने जोर दिया कि उनकी पार्टी अब पूरी तरह से संगठन को धार देने पर फोकस कर रही है।
विपक्ष की भूमिका पर बोले प्रशांत किशोर
चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए पीके ने कहा कि बिहार की जनता ने अपना फैसला सुना दिया है। जनता ने एनडीए को सत्ता और आरजेडी को विपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं, जन सुराज के लिए जनता ने यह तय किया है कि हम समाज के बीच रहकर उनके बुनियादी मुद्दों पर काम करें।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी और मजबूती के साथ निभाएगी। पीके के इस बदले हुए तेवर से साफ है कि वे आने वाले समय में बिहार की सियासत में अपनी पकड़ ढीली नहीं होने देना चाहते।










