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कर्नाटक में रिसोर्ट पॉलिटिक्स, राजनीति का सारा गणित यहीं बैठकर बनाया जा रहा है

कर्नाटक समेत देश की राजनीति बहुत तेजी से बदल रही है। लोग कहते हैं कि अनिश्चितता आ गई है राजनीति में। गौर से देखें, तो ऐसी निश्चितता बहुत कम देखी गई थी। इसे निश्चितता का ममता बनर्जी माडल कह सकते हैं।

कर्नाटक में रिसोर्ट पॉलिटिक्स, राजनीति का सारा गणित यहीं बैठकर बनाया जा रहा है

कर्नाटक समेत देश की राजनीति बहुत तेजी से बदल रही है। लोग कहते हैं कि अनिश्चितता आ गई है राजनीति में। गौर से देखें, तो ऐसी निश्चितता बहुत कम देखी गई थी। इसे निश्चितता का ममता बनर्जी माडल कह सकते हैं। बंगाल में हुए पंचायत चुनाव बताते हैं कि एक तिहाई से ज्यादा सीटों पर तो चुनाव से पहले ही निश्चित हो लिया था कि ममता के कैंडीडेट जीतेंगे।

इन सीटों पर ममता की ठुकाई से आतंकित कैंडीडेट मैदान में ही न उतरे। बाकी ममताजी के गुंडों ने इस तरह से ठुकाई पिटाई की कि चुनाव हो जाने के बाद सुनिश्चित हो लिया कि उनके कैंडीडेट ही जीतें। लोकतंत्र इतना निश्चित कब हुआ था जी। केंद्र में एक बार ममता बनर्जी प्रधानमंत्री बन गई तो फिर केंद्र की राजनीति से भी अनिश्चितता गायब हो लेगी।

ममता के पीएम रहते करीब एक तिहाई सांसद ममता के तो अगली बार बिना चुनाव के ही जीतेंगे। और चुनाव हो भी जायें, फिर भी ममताजी के बंदे ही जीतेंगे। केंद्र का लोकतंत्र भी निश्चित हो जायेगा। कोई कनफ्यूजन न रहेगा। कोई ओपिनियन पोल नहीं कोई एक्जिट पोल नहीं, ममताजी ही ममताजी। लोकतंत्र में कोई विरोधी जीवित न रह जाये, यह सुनिश्चित करने के बाद ममताजी लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करती हैं।

होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट चलाने वाले एक मित्र कह रहे थे कि अब होटल मैनेजमेंट कोर्स में हमें कुछ नए विषय जोड़ने पड़ रहे हैं। पालिटिकल मैनेजमेंट, विधायक सुश्रूषा, विधायक प्रबंधन जैसे विषय होटल मैनेजमेंट में जोड़े जायेंगे। खबर है कि उस रिजोर्ट के एक वेटर की पिटाई कर दी गयी, उस पर शक था कि वह विधायक के मोलभाव में लगा हुआ है।

यूं हुआ कि विधायक जी ने पानी मांगा, वेटर ने कहा-जी कितने गिलास लेंगे। विधायक की आलाकमान ने सुन लिया। वेटर की ठुकाई हो गयी-आरोप लगा कि पूछ रहा है कि विधायकजी कितनी रकम लेंगे। पहले बंदा फील्ड में जाता था पालिटिक्स के लिए। अब रिजोर्ट में जाता है पालिटिक्स के लिए। विधानसभाओं और संसद में ही कुछ रिजोर्ट बनवा दिये जाएं।

क्या पता दूर दराज रिजोर्ट से विधायक चलें, बीच में पानी पिलाने के जो वेटर आये, वही सौदा पक्का कर जाए। विधानसभा में ही रहेगा रिजोर्ट तो विधायक रिजोर्ट से सीधे विस में गिरेगा वोट के लिए। पालिटिक्स रिजोर्ट हो गयी है। विधायकजी रिजोर्ट में हैं। विधायक लगातार रिजोर्ट में रहने लगे तो रिजोर्ट के कर्मचारियों की आदतें खराब कर देंगे।

पता लगा कि वेटर निकला था रुम नंबर चार के लिए शराब लेकर, रुम नंबर पांच वाले ने ज्यादा रकम लेकर अपने यहां रखवा ली। लिमिटेड मात्रा में उपलब्ध थी शराब तो जहां अधिकतम रकम मिली वहीं रख आया वेटर। वेटर कस्टमर केयर करे या नोट केयर। विधायक ही क्या कर रहे हैं-अपने कस्टमर यानी वोटर की केयर कर रहे हैं या नोट केयर।

आइये रिजोर्ट चलें समकालीन राजनीति पर गहन अध्ययन अब सिर्फ रिजोर्ट में संभव है, किसी विश्वविद्यालय या इंस्टीट्यूट में नहीं। राजनीति का सारा गणित यहीं बैठकर बनाया जा रहा है। यहां तक कि सरकार के गठन या फिर सरकार के गिराने का सारा जोड़तोड़ भी यहां से चल रहा है।

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