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लैंगिक समानता की ओर वायुसेना

अभी वायुसेना में महिलाओं की हिस्सेदारी 8.5 फीसदी है, जो सेना के तीनों अंगों में सबसे ज्यादा है।

लैंगिक समानता की ओर वायुसेना
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केंद्र सरकार ने भारतीय वायुसेना में महिलाओं को लड़ाकू पायलट के रूप में शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूर कर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। इससे पहले तक महिलाएं देश के सशस्त्र बलों में लड़ाकू विमानों के पायलट की भूमिका में नहीं थीं। इससे महिलाओं के लिए बनी बनाई यह धारणा टूटेगी कि वे कठिन कार्य करने में सक्षम नहीं होती हैं। समाज पर भी इसका दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। आने वाले दिनों में जब वे अपने पुरुष समकक्षों के साथ अपना फर्ज निभाने के लिए आसमान में उड़ान भरेंगी तब सहज ही स्पष्ट हो जाएगा कि देश की स्त्रियां क्या कुछ करने में सक्षम हैं। यह वायुसेना की लैंगिक समानता की दिशा में भी बड़ा कदम है। यह कदम पुरुषों के वर्चस्व वाले इस क्षेत्र में महिलाओं को अपनी योग्यता साबित करने का मौका देगा। हालांकि वायुसेना में महिलाएं परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर को पहले से ही उड़ा रही हैं। इस काम में उन्होंने हर बार खुद को दूसरों से बेहतर साबित किया है, लेकिन किसी ना किसी वजह से उनके लड़ाकू विमान उड़ाने पर पाबंदी जारी रखी गई थी। दरअसल, वायुसेना इससे पहले महिलाओं को लड़ाकू विमान पायलट बनाने से ये कहते हुए मना करती रही थी कि लड़ाई के दौरान विमान मार गिराने की सूरत में पकड़े जाने पर उन्हें प्रताड़ना और उत्पीड़न का शिकार बनाया जा सकता है। बहरहाल, ये काल्पनिक आशंकाएं हैं और इनके चलते महिलाओं को अपनी बहादुरी दिखाने से वंचित नहीं रखा जा सकता। महिलाओं के स्वभाव और शारीरिक संरचना को लेकर भी सवाल उठाए जाते रहे हैं, लेकिन देश दुनिया में विभिन्न तरह के जोखिम वाले काम कर उन्होंने ऐसा कहने वालों को करारा जवाब दिया है। यही वजह है कि सरकार ने इन सारी आशंकाओं को दरकिनार करते हुए महिलाओं को वो सौगात दी है, जिसकी वो हकदार हैं। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक वायुसेना अकादमी के मौजूदा बैच में ट्रेनिंग हासिल कर रही महिला पायलटों में से ही लड़ाकू विमान उड़ाने के लिए महिलाओं का चयन किया जाएगा। फिर उन्हें ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसके बाद जून 2017 में महिला पालयट लड़ाकू विमान के कॉकपिट में दाखिल हो जाएंगी। अभी वायुसेना में महिलाओं की हिस्सेदारी 8.5 फीसदी है, जो सेना के तीनों अंगों में सबसे ज्यादा है। वायुसेना में कुल 1500 महिलाएं हैं। इनमें से 94 पायलट हैं, जबकि 14 नेविगेटर हैं। अब इस फैसले के बाद वायुसेना की सभी शाखाएं महिला अधिकारियों के लिए खुल गई हैं। वैसे भारत में महिलाओं को अब जाकर ये मौका मिल रहा है, जबकि अमेरिका, इजरायल और पाकिस्तान जैसे कई देशों में उन्होंने इन भूमिकाओं में भी खुद को साबित किया है। हालांकि भारत कभी भी युद्ध का सर्मथन नहीं करता और न ही इसकी लड़ने-भिड़ने की प्रवृत्ति है। यह पूरे विश्व को अपना कुटुंब मानता है और दुनिया को भी शांति के रास्ते पर ले जाने की मंशा रखता है, लेकिन जब तक दूसरे देश भी इस राह पर नहीं चलते, तब तक हमारे सामने अपनी सीमाओं की रक्षा की चुनौती बरकरार रहेगी। ऐसे में जब महिलाएं भी इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए तैयार हैं तब उन्हें इससे दूर रखने का कोई औचित्य नहीं है।

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