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वैश्विक बंधुत्व के संदेश को अपनाए दुनिया

सीरिया, नाइजीरिया, इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान आतंकवाद के सबसे बड़े ठिकाने बने हुए हैं।

वैश्विक बंधुत्व के संदेश को अपनाए दुनिया

तारीखों में ग्यारह सितंबर का दिन, प्रमुख रूप से दो घटनाओं के लिए याद किया जाता है। पहला, 1893 में अमेरिका के शिकागो में स्वामी विवेकानंद के दिए ऐतिहासिक भाषण के लिए और दूसरा, 2001 में अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेंड सेंटर पर आतंकी हमला के लिए। एक, दुनिया में सबसे बेहतरीन संबोधन और भाषण के लिए जाना जाता है तो दूसरा अब तक के सबसे भयावह आतंकी हमले के लिए। एक, दुनिया में भाईचारे और मिलजुलकर रहने का संदेश देता हैतो दूसरा, दुनिया को बिलगाव के रास्ते पर ले जाता है। एक, अहिंसा और मानवता का पाठ पढ़ाता है तो दूसरा, हिंसा, आतंक, बर्बरता और अराजकता का बीज बोता है। आतंकवाद आज समूची दुनिया के सामने बड़ी चुनौती के रूप में खड़ा है। सीरिया, नाइजीरिया, इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान आतंकवाद के सबसे बड़े ठिकाने बने हुए हैं। आज दुनिया में शायद ही कोई देश होगा जो आतंकवाद से प्रभावित नहीं हो। भारत लंबे समय से आतंक का भुक्तभोगी रहा है। दुनिया ने अलकायदा का बर्बर चेहरा देखा है। आज उससे भी खतरनाक संगठन आईएसआईएस का उदय पूरी दुनिया के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। इराक में इसकी हिंसक गतिविधियां दिल दहला रही हैं। हाल ही में दो अमेरिकी पत्रकारों की जिस निर्ममता से आईएसआईएस के आतंकियों ने हत्या की है, उसने आतंकवाद की इस चुनौती पर दुनिया को गंभीरता से विचार करने को विवश किया है। अमेरिका पर हुए 9/11 हमले की 13वीं बरसी के मौके पर बराक ओबामा ने कहा है कि अमेरिका आईएसआईएस का नामोनिशान मिटाकर ही दम लेगा। इन दिनों अमेरिका इराक में हवाई हमला कर रहा है, जिससे आतंकियों को नुकसान पहुंचा है। अमेरिका जमीन पर नहीं उतराना चाहता है। आईएसआईएस के खिलाफ इस लड़ाई में अरब लीग के अतिरिक्त 37 देश शामिल हुए हैं। माना जाता है कि दुनिया में आतंकवाद को बढ़ावा देने में अमेरिका की नीतियां भी एक हद तक जिम्मेदार रही हैं। यदि आतंकवाद को रोकना हैतो सभी लोगों को एक नजर से देखना होगा और ऐसी नीति बनानी होगी जिससे विकास में सबकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ठीक ही कहा हैकि अगर दुनिया स्वामी विवेकानंद के संदेशों पर अमल करती तो 11 सितंबर, 2001 की अमेरिका पर आतंकवादी हमले जैसी कायराना हरकत नहीं होती। स्वामी विवेकानंद ने शिकागो की धर्म संसद में दिए गए भाषण में वैश्विक बंधुत्व को अपनाने की सलाह दी थी। उन्होंने धर्म संसद में अमेरिका के भाइयों और बहनों से अपने भाषण की शुरुआत कर भारतवर्ष के समृद्ध इतिहास तथा मजबूत सांस्कृतिक जड़ों की तरफ पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित किया, लेकिन दुनिया ने इस नीति को नहीं अपनाया। तेज आर्थिक विकास हमने की है, जिससे समृद्धि आई है, परंतु इससे एक वर्ग को ही लाभ हुआ है। उसे विलासिता के सारे साधन मिले हैं। दूसरी तरफ बड़ी आबादी और गरीब हुई है। उपेक्षित हुई। इस विषमता ने एक हिंसक समाज के लिए उर्वर भूमि उपलब्ध कराई है। आज जरूरत विवेकानंद के संदेशों पर चलकर एकता, भाईचारा तथा विश्व शांति लाने की है।

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