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हम किसी का धर्म, भाषा या जाति को बदलना नहीं चाहते हैं : मोहन भागवत

संविधान कहता है कि हमें भावनात्मक एकीकरण लाने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन भावना क्या है? वो भावना है- यह देश हमारा है, हम अपने महान पूर्वजों के वंशज हैं और हमें अपनी विविधता के बावजूद एक साथ रहना होगा। इसे ही हम हिंदुत्व कहते हैं।

हम किसी का धर्म, भाषा या जाति को बदलना नहीं चाहते हैं : मोहन भागवत
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आरएसएस चीफ मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के चीफ मोहन भागवत ने रविवार को बयान दिया है कि जब आरएसएस के कार्यकर्ता कहते हैं कि यह देश हिंदुओं का है और 130 करोड़ लोग हिंदू हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि हम किसी का धर्म, भाषा या जाति को बदलना चाहते हैं। हमे संविधान की तुलना में कोई पावर सेंटर नहीं चाहिए हम इसपर विश्वास करते हैं।

हमें भावनात्मक एकीकरण लाने की कोशिश करनी चाहिए

संविधान कहता है कि हमें भावनात्मक एकीकरण लाने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन भावना क्या है? वो भावना है- यह देश हमारा है, हम अपने महान पूर्वजों के वंशज हैं और हमें अपनी विविधता के बावजूद एक साथ रहना होगा। इसे ही हम हिंदुत्व कहते हैं।

हम अपनी आंकाशा में एक हैं

मोहन भागवत ने आगे कहा कि हम अपने पंत से, नामों से, भाषा से, जाति उपजाति से, प्रांतो से एकदम अलग होंगे भी तो भी हम अपने पहचान से एक है, हम अपनी संस्कृति से एक हैं, हम अपनी आंकाशा में एक हैं और हम अपने भूतकाल में भी एक हैं।

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