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Triple Talaq Bill In Lok Sabha : दो बार लोकसभा में पास होने के बाद क्या राज्यसभा में फिर अटक सकता है तीन तलाक बिल!

राज्यसभा के कुल 245 सांसदों में से 50 फीसदी यानी 123 सांसदो के समर्थन के बाद ही इस विधेयक को मंजूरी मिल सकती है। राज्यसभा में भाजपा सांसदो की संख्या 71 है। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू के पांच सांसद राज्यसभा में थे जिसमें से 4 सांसद 20 जून को भाजपा के पाले में आ गए। इसके अलावा कई और पार्टियां हैं जिनका समर्थन इस बिल पर भाजपा के साथ है।

Triple Talaq Bill In Lok Sabha : दो बार लोकसभा में पास होने के बाद क्या राज्यसभा में फिर अटक सकता है तीन तलाक बिल!
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Triple Talaq Bill 2019

देश में तीन तलाक का मुद्दा एकबार फिर से चर्चा में है। प्रचंड जीत दर्ज करने के बाद मानसून सत्र में सबसे पहले तीन तलाक (Triple Talaq) को गैर कानूनी ठहराने वाला मुस्लिम महिला विधेयक (Muslim Womens Bill) पेश किया गया। उम्मीद के मुताबिक शोर शराबा हुआ फिर सदन में मतदान के जरिए निष्कर्ष पर पहुंचने की कोशिश की गई। सदन में मौजूद सांसदो में 186 इस बिल के पक्ष में व 74 वोट इस बिल के विरोध यानी तीन तलाक के समर्थन में वोट किया।

इस तरह पिछले बार की तरह भाजपा ने इस बिल को लोकसभा से पास करवा लिया। भाजपा सरकार ने इसे दो अध्यादेशों के जरिए जारी रखा है। पहला अध्यादेश 2018 (First ordinance 2018) के सितंबर में जारी किया गया, इसे 2019 के फरवरी में लागू किया गया। दरअसल किसी भी अध्यादेश की उम्र 6 महीने से ज्यादा नहीं होती है इसलिए शुक्रवार को दोबारा जारी किया गया। क्योंकि पुराना वाला अध्यादेश जुलाई में खत्म हो जाएगा। तीन तलाक को लेकर अब असली परीक्षा राज्यसभा में है जहां अभी भाजपा के पास बहुमत नहीं है।

राज्यसभा के कुल 245 सांसदों में से 50 फीसदी यानी 123 सांसदो के समर्थन के बाद ही इस विधेयक को मंजूरी मिल सकती है। राज्यसभा में भाजपा सांसदो की संख्या 71 है। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू के पांच सांसद राज्यसभा में थे जिसमें से 4 सांसद 20 जून को भाजपा के पाले में आ गए। इसके अलावा कई और पार्टियां हैं जिनका समर्थन इस बिल पर भाजपा के साथ है।


तमिलनाडु की एआईएडीएमके के 13, आंध्रप्रदेश की वाईएसआरसीपी के 2, टीआरएस के 6, बीजेडी के 5 सांसदों का भी समर्थन भारतीय जनता पार्टी के साथ है। इसके अलावा 5 जुलाई को 6 सीटों के लिए चुनाव होने हैं जहां सत्ताधारी पार्टी की जीत काफी हद तक तय लग रही है। कुल जोड़ दें तो पार्टी बहुमत के एकदम पास खड़ी नजर आती है। फिर भी बाकी के सांसदो का समर्थन हासिल करने में पार्टी को जोड़-तोड़ करनी ही पड़ेगी।

भाजपा द्वारा अपनी दूसरी पारी में पहले विधयक के रूप में तीन तलाक बिल को लाने के पीछे राजनैतिक फायदा भी दिखता है। इसी साल देश के तीन राज्यों हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव होने है। इन तीनों राज्यों में भाजपा की पहले से सरकार है साथ ही तीनों राज्यों में मुस्लिम वोटर हमेशा से निर्णायक साबित रहे हैं। झारखंड में करीब 15 फीसदी मुस्लिम है, महाराष्ट्र में 11.56 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं। 7 फीसदी मुस्लिम आबादी हरियाणा में है। ऐसे में तीन तलाक का बिल पास होना इन राज्यों में इस वर्ग का वो वोट भी दिलवा देगा जो कभी भाजपा के हिस्से आया ही नहीं।

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