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रॉकेट इंजन 'रमन' का हुआ सफल परीक्षण, एक साथ कई सैटेलाइट को ले जाने में है सक्षम

'रमन' एक थ्रीडी प्रिंटेड रॉकेट इंजन है। इसका नाम नोबेल पुरस्कार विजेता सीवी रमन के नाम पर रखा गया है। स्काईरूट एरोस्पेस के सीईओ और सहसंस्थापक पवन कुमार चंदना ने कहा कि यह परंपरागत रॉकेट इंजन की तुलना में 50 प्रतिशत हल्का है। इस रॉकेट इंजन में काम पुर्जे लगे होने के कारण इसका लीड टाइम लगभग 80 प्रतिशत बढ़ जाता है।

रॉकेट इंजन रमन का हुआ सफल परीक्षण, एक साथ कई सैटेलाइट को ले जाने में है सक्षम
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भारतीय स्टार्टअप स्काईरूट एरोस्पेस ने गुरुवार को एक साथ कई सैटेलाइट ले जाने में सक्षम अपर स्टेज रॉकेट इंजन 'रमन' (Rocket Engine Raman) का सफल परीक्षण किया गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व वैज्ञानिक द्वारा स्थापित स्काईरूट एरोस्पेस मेेक इन इंडिया (Make In India) के तहत भारत के पहले निजी रूप से निर्मित अंतरिक्ष प्रक्षेपण वाहन को तैयार कर रहा है।

नोबेल पुरस्कार विजेता के नाम पर रखा गया नाम

'रमन' एक थ्रीडी प्रिंटेड रॉकेट इंजन है। इसका नाम नोबेल पुरस्कार विजेता सीवी रमन के नाम पर रखा गया है। स्काईरूट एरोस्पेस के सीईओ और सहसंस्थापक पवन कुमार चंदना ने कहा कि यह परंपरागत रॉकेट इंजन की तुलना में 50 प्रतिशत हल्का है। इस रॉकेट इंजन में काम पुर्जे लगे होने के कारण इसका लीड टाइम लगभग 80 प्रतिशत बढ़ जाता है।

पवन कुमार चंदना ने इंजन की खासियत बताई

* यह इंजन कई बार बंद होकर पुन: चालू हो जाता है।

* यह इंजन एक ही मिशन में कई उपग्रहों को उनकी कक्षाओं में स्थापित करने में सक्षम है।

* इस रमन इंजन का निर्माण अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने की पहल के तहत हुआ है।

स्काईरूट एरोस्पेस के सीईओ और सहसंस्थापक पवन कुमार चंदना ने बताया कि कंपनी दो अन्य रॉकेट स्टेज तैयार कर रही हैं। जिनका परीक्षण 6 महीने के अंदर हो जाएगा।

* स्काईरूट एरोस्पेस दिसंबर 2021 में अपना पहला रॉकेट 'विक्रम-1' नाम से लॉन्च करने की तैयारी में है।

* रॉकेट 'विक्रम-1' एक बार में कई उपग्रह को कक्षा में स्थापित करेगा।

* रॉकेट लॉन्च के लिए स्काईरूट ने अब तक 31.5 करोड़ रुपये का फंड जुटा लिया है।

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