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GBRC के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के सूक्ष्म जीनोम सीक्वेंस को ढूंढ निकाला, अबतक बदल चुका है 9 रूप

गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर भारत में एकमात्र राज्य सरकार प्रयोगशाला है जिसने COVID19 पूरे जीनोम अनुक्रम की सूचना दी है।

GBRC के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के सूक्ष्म जीनोम सीक्वेंस को ढूंढ निकाला, अबतक बदल चुका है 9 रूप
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गुजरात को गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (जीबीआरसी) में वैज्ञानिकों पर गर्व है। क्योंकि जीबीआरसी के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के वंशसूत्र यानी इसके सूक्ष्म जीनोम सीक्वेंस को ढूंढ निकाला है। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के ऑफिस के ट्विटर पेज से इस बात की जानकारी दी गई है।

ट्वीट के मुताबिक, गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर भारत में एकमात्र राज्य सरकार प्रयोगशाला है जिसने COVID19 पूरे जीनोम अनुक्रम की सूचना दी है। जो मूल, ड्रग लक्ष्य, वैक्सीन और वायरलेंस के साथ जुड़ाव पर नज़र रखने में सहायक होगा। इस खोज से कोविड-19 की उत्पत्ति, इसकी दवा और उसके परीक्षण में तेजी से काम करने में सहायता मिलेगी, साथ ही उनके साइड इफेक्ट का पता लगाना आसान होगा।

चीन से लेकर अमेरिका के वैज्ञानिक अभी तक नहीं हासिल कर पाए पूरी जानकारी

खबरों से मिली जानकारी के मुताबिक, चीन से लेकर अमेरिका तक दुनियाभर के वरिष्ठ वैज्ञानिक कोरोना वायरस (कोविड-19) के बारे में पूरी तरह से जानकारी हासिल नहीं कर पाएं हैं। लेकिन जीबीआरसी के वैज्ञानिकों ने यह कारनाम कर दिखाया है। अब गुजरात की लैब से मिली मदद पूरे वैज्ञानिक जगत के लिए काम आएगी।

इस खतरनाक कोरोना वायरस की न्यूक्लियर सीक्वेंसिंग विश्वभर में हुई है। मगर इस रूप बदलने वाले वायरस में तीन परिवर्तन (म्यूटेशन) ऐसे हैं, जिनके बारे में मालूम नहीं था क्योंकि यह बिल्कुल नए हैं। गुजरात की लैब में जीनोम सीक्वेंस को पूरा करके वारयस की पूरी कुंडली बनाने का काम हुआ है।

वायरस में आरएनए की भूमिका अहम होती है

रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर प्रो.चैतन्य जोशी के मुताबिक, हर कोशिका में जेनेटिक मटेरियल डी ऑक्सी राइबोन्यूक्लिक एसिड या राइबोन्यूक्लिक एसिड के रूप में होता है। मानव में प्रमुखता से डीएनए होता है, जबकि वायरस में आरएनए की भूमिका अहम होती है। इन्हीं से मिलकर जीन्स बनते हैं।

जोकि किसी भी जीव के विकास और व्यवहार को नियंत्रित करते हैं। साथ ही बीमारियों के मुकाबले में भी महत्वपूर्ण होते हैं। इसे ही जीनोम संरचना कहते हैं। रिसर्च में सामने आया है कि कोविड-19 वायरस की संरचना और व्यवहार को आरएनए (राइबोन्यूक्लिक एसिड) नियंत्रित करता है।

कोरोना वायरस बदल चुका है 9 रूप

बताया जा रहा है कि कोरोना वायरस अबतक नौ रूप बदल चुका है। यह वायरस जब एक व्यक्ति से दूसरे में संक्रमित होता है तो अपने अस्तित्व को बचाने के लिए रूप बदलता रहता है। जोकि म्यूटेशन कहलाता है।

रिसर्च से खुलासा हुआ है कि यह एक महीने में दो म्यूटेशन पैदा कर सकता है। हर नया म्यूटेशन पिछले वाले से या तो ताकतवर होगा या फिर उससे कमजोर हो सकता है। इस वायरस में अब तक 9 म्यूटेशन मिले हैं। जिनमें से 6 म्यूटेशन की जानकारी पहले हो चुकी है और अब तीन गुजरात की लैब ने रिपोर्ट किए हैं।

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