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मोदी सरकार ने टैक्सपेयर्स को दिया एक नया खास प्लेटफॉर्म, जानें ट्रांसपैरेंट टैक्सेशन में मिलेे 3 बड़े अधिकारों के बारे में

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने देश के ईमानदार करदाताओं को प्रोत्साहन और कर प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक नए प्लेटफार्म की शुरुआत कर दी है।

मोदी सरकार ने टैक्सपेयर्स को दिया एक नया खास प्लेटफॉर्म, जानें ट्रांसपैरेंट टैक्सेशन में मिलेे 3 बड़े अधिकारों के बारे में
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने देश के ईमानदार करदाताओं को प्रोत्साहन और कर प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक नए प्लेटफार्म की शुरुआत कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश के ईमानदार टैक्स पर को ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन इन द ऑनेस्ट प्लेटफार्म की सुविधा दी है। टैक्स सिस्टम में सुधार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार ने यह प्लेटफार्म शुरू किया है। जिसमें फेसलैस असेसमेंट-अपील और टैक्सपेयर्स चार्टर जैसे बड़े रिफॉर्म हैं।

करदाताओं को मिले यह तीन बड़े अधिकार

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नए टैक्स प्लेटफार्म के जरिए देश के करदाताओं को फेसलेस एसेसमेंट, टैक्स पेयर्स चार्टर, फेसलेस अपील की सुविधा मिलेगी। जिससे आप टैक्स देने में करदाताओं को आसानी रहेगी।

नए प्लेटफार्म की शुरुआत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में चल रहा स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स का सिलसिला आज एक नए पड़ाव पर पहुंचा है। 21वीं सदी के टैक्स सिस्टम की इस नई व्यवस्था का आज लोकार्पण किया गया है। ईमानदार का सम्मान।

पीएम ने कहा कि देश का ईमानदार करदाता राष्ट्रनिर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। जब देश के ईमानदार करदाता का जीवन आसान बनता है। वो आगे बढ़ता है, तो देश का भी विकास होता है, देश भी आगे बढ़ता है।

आगे कहा कि हमारे लिए रिफार्म का मतलब है। रिफार्म नीति आधारित हो, रिफार्म टुकड़ों में नहीं हो, रिफार्म, होलिस्टिक हो, एक रिफार्म दूसरे रिफार्म का आधार बने, नए रिफार्म का मार्ग बनाए। और ऐसा भी नहीं है कि एक बार रिफार्म करके रुक गए। ये निरंतर, सतत चलने वाली प्रक्रिया है।

रिफार्म के प्रति भारत की इसी प्रतिबद्धता को देखकर विदेशी निवेशकों का विश्वास भी भारत पर लगातार बढ़ रहा है। कोरोना के इस संकट के समय भी भारत में रिकॉर्ड एफडीआई का आना इसी का उदाहरण है। पहले 10 लाख रुपये के ऊपर के विवादों को लेकर सरकार हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाती थी। विवाद से विश्वास जैसी योजना से कोशिश ये है कि ज्यादातर मामले कोर्ट से बाहर ही सुलझ जाएं। प्रक्रियाओं की जटिलताओं के साथ-साथ देश में टैक्स भी कम किया गया है। 5 लाख रुपये की आय पर अब टैक्स जीरो है। बाकी स्लैब में भी टैक्स कम हुआ है।

कॉर्पोरेट टैक्स के मामले में हम दुनिया में सबसे कम tax लेने वाले देशों में से एक हैं। साल 2012-13 में जितने टैक्स रिटर्न्स होते थे, उसमें से 0.94 परसेंट की स्क्रूटनी होती थी। वर्ष 2018-19 में ये आंकड़ा घटकर 0.26 परसेंट पर आ गया है।स्क्रूटनी का 4 गुना कम होना, अपने आप में बता रहा है कि बदलाव कितना व्यापक है।

जानकारी के लिए बता दें कि देश के करदाता सरकार से मांग कर रहे थे कि उन्हें टैग देने पर सुविधाएं मिलें। कई एक्सपर्ट यह मांग करते रहे हैं कि टैक्सपेयर्स को उसी तरह से कुछ खास सुविधाएं देनी चाहिए जैसे कि कई विकसित देशों में मिलती हैं।

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