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IIT मद्रास में कोरोना विस्फोट, 31 नए मामले सामने आने के बाद पॉजिटिव केसों की संख्या 111 हुई

ईआईटी मद्रस (IIT Madras) में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या अब 171 हो गई है।

IIT मद्रास में कोरोना विस्फोट, 31 नए मामले सामने आने के बाद पॉजिटिव केसों की संख्या 111 हुई
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास अब एक कोविड-19 समूह में बदल गया है। ताजा अपडेट के अनुसार, आईआईटी मद्रस (IIT Madras) में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या अब 171 हो गई है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, IIT मद्रास में कोविड-19 (Covid-19) के आज 31 और पॉजिटिव मामले सामने आए।

जिसके बाद आईआईटी में कुल पॉजिटिव केसों की संख्या 111 हो गई है। तमिलनाडु के स्वास्थ्य सचिव जे राधाकृष्णण ने इस बात की जानकारी दी है। अब तक कुल 4,974 नमूनों का परीक्षण किया गया है। बता दें कि आईआईटी मद्रास में बीते दिनों से कोरोना केस सामने आ रहे हैं। लगातार हो रही जांच में कोरोना संक्रमितों की संख्या में बढ़ोतरी होती जा रही है।





बता दें कि तमिलनाडु के स्वास्थ्य सचिव डॉ जे राधाकृष्णन ने यह सुनिश्चित करने के लिए कई बार परिसर का दौरा किया जानकारी ली कि कोविड -19 निवारक उपाय किए जा रहे हैं या नहीं। चेन्नई के क्षेत्रीय चिकित्सा अधिकारी डॉ एल्बी और स्वास्थ्य सचिव ने भी संस्थान का दौरा किया और छात्रों को हर समय फेस मास्क पहनने और सामाजिक दूरी और अन्य संबंधित प्रोटोकॉल बनाए रखने की सलाह दी।

बीते दिनों तमिलनाडु के स्वास्थ्य विभाग ने कहा था कि पूरे जीनोमिक अनुक्रमण के लिए संस्थान से शुरुआती 25 नमूने भेजे गए थे। लेकिन इनमें नए वेरिएंट नहीं मिले हैं। संपूर्ण जीनोमिक अनुक्रमण के लिए भेजे गए आईआईटी-एम से लिये गए सभी 25 नमूनों में ओमिक्रोन के बीए.2 उप-संस्करण का पता चला है और किसी भी नए प्रकार का पता नहीं चला है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने एक बयान में कहा, पहले ही मार्च में 93 प्रतिशत परिणामों ने बीए.2 ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट का खुलासा किया था।

दूसरी ओर, आईआईटी-मद्रास के शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें कहा गया था कि हल्के या मध्यम स्थिति वाले कोविड -19 रोगियों का इलाज इंडोमेथेसिन से किया जा सकता है। यह अकेले अमेरिका में प्रति वर्ष 20 लाख से अधिक नुस्खे के साथ एक सस्ती, गैर-स्टेरायडल anti-inflammatory दवा है। यह विभिन्न प्रकार की सूजन संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए 1960 के दशक से व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली एक स्थापित दवा है।

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