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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्य सभा के चेयरमैन जगदीप धनखड़ की चिट्ठी का जवाब दिया। इसमें उन्होंने धनखड़ और सदन दोनों की कार्यशैली पर सवाल उठाया।

Dhankhar Vs Kharge: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को राज्य सभा के चेयरमैन जगदीप धनखड़ की चिट्ठी का जवाब दिया। अपने जवाबी खत में कांग्रेस अध्यक्ष ने धनखड़ की चिट्ठी पर ही सवाल उठा दिया। साथ ही उन्होंने धनखड़ के व्यक्तिगत तौर पर मुलाकात करने के अनुरोध को ठुकरा दिया। खड़गे ने कहा कि वह दिल्ली से बाहर हैं। ऐसे में मुलाकात संभव नहीं है। उन्होंने राज्यसभा की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठाया। 

राज्यसभा चेयरमैन को होना चाहिए तटस्थ
खड़गे ने लिखा कि आपकी (धनखड़) चिट्ठी दुर्भाग्य से संसद को लेकर सरकार के निरंकुश और अहंकारी रवैये को सही ठहराने वाली है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने धनखड़ के पत्र में उठाए गए मुद्दों का जवाब दिया। उन्होंने लिखा कि राज्य सभा के चेयरमैन के तौर पर आपको निष्पक्ष और तटस्थ होकर इन मुद्दों पर नजर डालनी चाहिए। कांग्रेस नेता ने लिखा कि सभापति सदन में संरक्षक की भूमिका अदा करते हैं। उन्हें सदन की गरिमा बनाए रखना चाहिए। संसदीय विशेषाधिकारों की रक्षा का हिमायती होना चाहिए।

बिना बहस के विधेयकों के पारित होने का मुद्दा उठाया
मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद में बिना बहस के विधेयकों के पारित होने का मुद्दा उठाया। इस पर सरकार की जिम्मेदारी तय करने में विफल रहने पर पीठासीन अधिकारियों की भूमिका को लेकर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि इतिहास इस बात को याद रखेगा। पीठासीन अधिकारियों द्वारा अहम मुद्दों को नजरअंदाज किए जाने पर गौर किया जाएगा। यह सब काफी दुखद होगा। खड़गे ने सांसदों के निलंबन पर नाराजगी भी जाहिर की। 

क्या कहा था धनखड़ ने अपनी चिट्ठी में
जगदीप धनखड़ ने 23 दिसंबर को खड़गे को चिट्ठी लिखी थी। इसमें सांसदों के निलंबन से दुखी, निराश और हताश होने की बात कही। धनखड़ ने सदन में हुए हंगामे को एक साजिश बताया था। इसमें कांग्रेस के सांसदों के शामिल होने का संकेत दिया था। मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से गतिरोध को समाप्त करने के लिए चर्चा करने के अनुरोध को बार-बार ठुकराने का जिक्र किया। धनखड़ ने चिट्ठी में खड़गे को अपने आवास पर बातचीत करने के लिए भी आमंत्रित किया था। 

संसद में हंगामे के बाद से आमने-सामने हैं धनखड़ और खड़गे
बीते दिनों संसद की सुरक्षा में चूक होने के बाद से ही मल्लिकार्जुन खड़गे और धनखड़ आमने-सामने हैं। संसद के दोनों सदनों से कुल 146 सांसदों के निलंबन के मुद्दे पर दोनों के बीच ठनी है। संसद के बीते सत्र के दौरान कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियों के नेता ने हंगामा किया था। इसके बाद सांसदों पर कार्रवाई की गई थी। राज्य सभा से 46 सांसदों को निलंबित कर दिया गया था। इसको लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जताई थी। वहीं, धनखड़ ने राज्यसभा चेयरमैन पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने की बात कहते हुए कार्रवाई को जायज ठहराया। 

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