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अक्षय कुमार नहीं बल्कि ये शख्स है रियल ''पैडमैन'', जानें पूरी कहानी

अक्षय कुमार की आने वाली फिल्म ''पैडमैन'' 9 फरवरी को रिलीज होने वाली है। इस फिल्म की कहानी महिलाओं को हर महीने होने वाले माहवारी और उनके स्वास्थ्य पर आधारित है।

अक्षय कुमार नहीं बल्कि ये शख्स है रियल

अक्षय कुमार की आने वाली फिल्म 'पैडमैन' 9 फरवरी को रिलीज होने वाली है। इस फिल्म की कहानी महिलाओं को हर महीने होने वाले माहवारी और उनके स्वास्थ्य पर आधारित है।

बता दें कि यह फिल्म अरुणाचलम मुरुगननाथम की जिंदगी से प्रेरित होकर बनाई गई है। जी हां, अक्षय कुमार नहीं बल्कि ये शख्स रियल 'पैडमैन' है।

कौन हैं अरुणाचलम

अरुणाचलम तमिलनाडु के कोयंबटूर में रहते हैं, जिन्होंने सेनेटरी नैपकिन बनाने के लिए दुनिया की सबसे सस्ती मशीन बनाई है। वह स्कूल ड्रॉप आउट है। महिलाओं को इस समस्या से ऊपर उठाने के लिए उन्होंने यह कदम उठाया। उनके पिता हैंडलूम वर्कर थे, इसलिए उन्हें मशीन और पैड्स की रुई के बारे में अच्छे से जानकारी थी।

ये था अरुणाचलम का मिशन

अरुणाचलम को यह पता चला कि उनके गांव के आस-पास के एरिया में महिलाएं सेनेटरी नैपकिन का इस्तेमाल बहुत कम करती हैं। उन्हें पता चला कि 10 में से सिर्फ 1 महिला ही सेनेटरी नैपकिन का प्रयोग करती है। यही कारण है कि अरुणाचलम का यह मिशन बन गया था कि वह देश भर की गरीब महिलाओं को सस्ते दाम पर सेनेटरी नैपकिन मुहैया कराएं।

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ऐसे हासिल किया मुकाम

अरुणाचलम को 1998 में उनकी पत्नी शांति से पता चला कि पीरियड्स के समय महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उन्होंने जल्द ही रुई से एक सेनेटरी पैड बनाया और अपनी पत्नी से इसे यूज करने के लिए कहा। इसके बाद फीडबैक जानने के लिए उनसे एक महीना इंतजार नहीं हुआ। इसलिए उन्होंने अपनी बहन, लोकल मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट्स से ट्राई करने के लिए कहा, लेकिन सबने इसे यूज करने से मना कर दिया।

खुद पहना पैड

इसके फीडबैक को जानने के लिए अरुणाचलम ने खुद ही पैड पहनने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने एक गर्भाशय बनाया और उसमें बकरी का खून भरकर एक पाइप लगाई और उसे कमर पर बांध लिया। इसके बाद जब वह चलते या साइकिल चलाता तो खून रिस कर नैपकिन में गिरता। इस तरीके से वह चेक कर पाए कि उनके द्वारा बनाए गए सेनेटरी नैपकिन्स में कितना सोख पाने की क्षमता है।

लगे कई साल

अरुणाचलम को लगभग 2 साल 3 महीने के बाद यह पता लगा कि सेनेटरी पैड्स किन चीजों के बने होते हैं। फिर इसके साढ़े चार साल बाद उन्होंने पैड्स बनाने की सबसे सस्ती मशीन बनाई।

जीते कई खिताब

अरुणाचलम ने इसके लिए कई खिताब जीते। वह पैडमैन के नाम से फेमस हैं। नेशनल इनोवेशन अवॉर्ड की 943 एन्ट्रीज में उनकी मशीन को पहला स्थान दिया गया। बता दें कि अरुणाचलम ने 18 महीनों में 250 मशीन बनाई। 2014 में उन्हें टाइम्स मैगजीन ने 100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में भी सेलेक्ट किया। इसके अलावा 2016 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से भी नवाजा गया।

आज भी बना रहे पैड

अरुणाचलम आज भी जयश्री इंडस्ट्रीज नाम से नैपकिन का बिजनेस चला रहे हैं। पूरे भारत में इसकी 2003 यूनिट्स हैं। इतना ही नहीं यहां 21000 से ज्यादा महिलाएं काम करती हैं।

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