Sabudana Khichdi: महाशिवरात्रि का पावन पर्व आते ही घरों में भक्ति के साथ-साथ व्रत के खास व्यंजनों की तैयारी भी शुरू हो जाती है। फलाहार में सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली डिश है साबूदाना खिचड़ी, लेकिन अक्सर यह चिपचिपी या गीली बन जाती है। अगर आप भी चाहते हैं कि आपकी खिचड़ी एकदम खिली-खिली और दानेदार बने, तो तरीका सही होना बेहद जरूरी है।
सही भिगोने की तकनीक, मूंगफली का संतुलित स्वाद और हल्की आंच पर पकाने का धैर्य यही है परफेक्ट साबूदाना खिचड़ी का राज। इस महाशिवरात्रि पर अपनाएं यह आसान विधि और व्रत के फलाहार को बनाएं स्वादिष्ट और पौष्टिक।
साबूदाना खिचड़ी बनाने के लिए सामग्री
- 1 कप साबूदाना
- 2 मध्यम उबले आलू (क्यूब्स में कटे)
- 1/2 कप भुनी मूंगफली (दरदरी पिसी)
- 2 हरी मिर्च (बारीक कटी)
- 1 छोटा चम्मच जीरा
- 8-10 करी पत्ते (वैकल्पिक)
- सेंधा नमक स्वादानुसार
- 1/2 छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर
- 1 बड़ा चम्मच देसी घी या मूंगफली तेल
- 1 बड़ा चम्मच नींबू का रस
- बारीक कटा हरा धनिया
साबूदाना खिचड़ी बनाने का तरीका
साबूदाना खिचड़ी स्वाद से भरपूर फलाहार है। इसे तैयार करने के लिए सबसे अहम स्टेप है साबूदाना को भिगोना। साबूदाना को पहले अच्छी तरह धो लें ताकि अतिरिक्त स्टार्च निकल जाए। फिर इसे एक बर्तन में डालकर इतना ही पानी डालें कि साबूदाना बस डूब जाए। इसे 4-5 घंटे या रातभर ढककर रख दें।
जब दाने उंगलियों से दबाने पर आसानी से दब जाएं और आपस में चिपके नहीं, तो समझिए साबूदाना तैयार है। अब एक कढ़ाही में घी या मूंगफली तेल गरम करें। उसमें जीरा डालें और चटकने दें। अब हरी मिर्च और करी पत्ता डालकर हल्का भूनें।
इसके बाद उबले आलू डालें और 2-3 मिनट तक हल्का सुनहरा होने दें। इससे खिचड़ी में कुरकुरापन और स्वाद बढ़ेगा। अब भीगा हुआ साबूदाना कढ़ाही में डालें। साथ ही दरदरी पिसी मूंगफली, सेंधा नमक और काली मिर्च मिलाएं। गैस की आंच धीमी रखें और लगातार हल्के हाथ से चलाते रहें।
ज्यादा चलाने से दाने टूट सकते हैं, इसलिए सावधानी रखें। 3-4 मिनट में साबूदाना पारदर्शी दिखने लगेगा यही संकेत है कि खिचड़ी तैयार है। आखिर में गैस बंद कर नींबू का रस और हरा धनिया मिलाएं। चाहें तो ऊपर से थोड़ी भुनी मूंगफली भी डाल सकते हैं।
ध्यान रखने योग्य बातें
- साबूदाना ज्यादा पानी में न भिगोएं।
- पकाते समय तेज आंच से बचें।
- मूंगफली पाउडर नमी को संतुलित करता है, इसे जरूर मिलाएं।
- खिचड़ी को ढककर ज्यादा देर न रखें, वरना भाप से नरम हो जाएगी।
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(लेखक:कीर्ति)











