अनिल सामंत- जगदलपुर। बस्तर से सटे ओड़िशा के कोरापुट जिला अंतर्गत व्यापारिगुड़ा ब्लॉक की रामगिरी पर्वत श्रृंखला में स्थित गुप्तेश्वर ग्राम का भगवान गुप्तेश्वर महादेव मंदिर इस बार 15 फरवरी को महाशिवरात्रि महापर्व पर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनेगा। सघन वन क्षेत्र की पहाड़ियों के बीच गुफा के भीतर विराजे महादेव के दर्शन के लिए भक्तों को लगभग 108 सीढ़ियों की ऊंचाई पार करनी पड़ती है। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
मार्ग है बेहद चुनौतीपूर्ण
बस्तर जिला मुख्यालय से लगभग 55 किमी दूर माचकोट रेंज के तिरिया वन क्षेत्र से होकर जाने वाला मार्ग बेहद चुनौतीपूर्ण है। जगदलपुर से तिरिया तक पक्की सड़क है, लेकिन इसके बाद कच्चा, संकरा और पहाड़ी रास्ता शुरू होता है। श्रद्धालुओं को खोलाब नदी के तट तक पहुंचकर बांस की अस्थायी चटाइयों और संकरे पुलों के सहारे तेज प्रवाह को पार करना पड़ता है। थोड़ी सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है।

श्रद्धालुओं की राह आसान बनाने का प्रयास
हर वर्ष माचकोट रेंज का वन अमला खोलाब नदी पर दो दर्जन से अधिक अस्थायी बांस पुलों का निर्माण कर श्रद्धालुओं की राह आसान बनाने का प्रयास करता है, फिर भी जोखिम बना रहता है। इस बीच पक्का पुलिया निर्माण के लिए राशि स्वीकृत होने के बावजूद कार्य प्रारंभ न होना श्रद्धालुओं के लिए चिंता का विषय है। विधायक एवं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष किरण सिंहदेव ने गत वर्ष इस स्थल पर पक्का पुलिया निर्माण के लिए राशि स्वीकृत कराई है।
आस्था बनाम जोखिम कब बनेगा स्थायी समाधान?
गुप्तेश्वर धाम की पहचान केवल धार्मिक आस्था से नहीं, बल्कि रोमांच और जोखिम से भी जुड़ी है। खोलाब नदी का तेज प्रवाह, बांस के अस्थायी पुल, सुई जैसी नुकीली पहाड़ियों के बीच संकरा रास्ता और घना वन क्षेत्र- ये सब मिलकर यात्रा को कठिन बनाते हैं। महाशिवरात्रि पर लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बन जाती है। पक्का पुलिया निर्माण की स्वीकृति से उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में यह जोखिम कम होगा और श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम मार्ग मिलेगा। अब सबकी निगाहें निर्माण कार्य के शीघ्र प्रारंभ होने पर टिकी हैं।

75 प्रतिशत काम पूरा
तिरिया के सघन वन क्षेत्र के खोलाब नदी पार कर ओड़िसा स्थित गुप्तेश्वर महादेव मंदिरर पहुंचने बांस से चटाई का अस्थाई पुलिया का काम 75 फीसदी पूरा हो चुका है। शनिवार तक शत प्रतिशत कार्य पूरा हो जाएगा।
सुमित शाह, रेंजर माचकोट परिक्षेत्र









