हेमंत वर्मा- धरसींवा। बचपन की शरारतें, क्लासरूम की वो यादें और गुरुओं का दुलार। इन सबको एक पल में समेट लेना आसान नहीं होता। कुछ ऐसा ही मंजर क्षेत्र के एम्बिशन इंग्लिश मीडियम स्कूल में देखने को मिला, जहां बोर्ड परीक्षा से ठीक एक सप्ताह पूर्व दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए विदाई समारोह का आयोजन किया गया। यह समारोह किसी दिखावे या शोर-शराबे से दूर, सादगी और संवेदनाओं की एक ऐसी मिसाल था, जिसने उपस्थित हर व्यक्ति के दिल को छू लिया।

विदाई की इस बेला में विद्यार्थियों ने केजी वन से अब तक अपने करीब 13 साल के सफर को बेहद ही रचनात्मक और भावुक तरीके से पेश किया। केजी-1 की उस पहली सीढ़ी से लेकर दसवीं तक के सफर की यादों को संजोने के लिए बच्चों ने 'यादों का वटवृक्ष' तैयार किया। विद्यार्थियों ने कोरे कैनवास पर बने एक चित्र सूखे वृक्ष को अपने अंगूठों की छाप से बनी पत्तियों से सजाया। यह दृश्य देख वहां मौजूद हर किसी की आंखें भर आईं, क्योंकि अंगूठे की हर छाप के पीछे किसी का बचपन, किसी की हंसी और किसी का संघर्ष छिपा था। बच्चों ने दर्शाया कि जिस तरह एक वटवृक्ष अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है, वैसे ही वे भी इस स्कूल से मिली सीख को जीवन भर अपने सीने से लगाकर रखेंगे।

बोर्ड परीक्षा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का लिया वादा
जैसे ही विदाई का समय करीब आया, स्कूल का शांत परिसर सिसकियों और भावुक कर देने वाले शब्दों से भर गया। अपने प्रिय शिक्षकों से अलग होने का गम बच्चों के चेहरों पर साफ झलक रहा था। शिक्षकों ने भी भारी मन से अपने इन लाड़लों को गले लगाया और उनके सिर पर हाथ रखकर बोर्ड परीक्षा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का आशीर्वाद दिया। शिक्षकों ने बच्चों को सीख दी कि अंक तो जीवन का एक हिस्सा हैं, लेकिन एक नेक और ईमानदार इंसान बनना ही सबसे बड़ी उपलब्धि है।

स्कूल के आदर्श पर आंच नही आने देने का वादा
विद्यार्थियों ने भी रुंधे गले से अपने शिक्षकों को यह भरोसा दिलाया कि, वे दुनिया के किसी भी कोने में रहें, लेकिन स्कूल के आदर्शों को कभी आंच नहीं आने देंगे। उन्होंने वादा किया कि वे कठिन परिश्रम कर न केवल अपने माता-पिता और स्कूल का नाम रोशन करेंगे, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभाएंगे। सादगी से भरे इस आयोजन में विदा होते समय बच्चों का स्कूल के प्रति प्रेम और शिक्षकों का वात्सल्य देखकर पूरा माहौल अत्यंत गमगीन हो गया। अंत में, पुरानी यादों के भारी मन और नई मंजिलों के सपनों के साथ विद्यार्थियों ने अपने स्कूल की चौखट को अंतिम बार नमन किया।









