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बच्चों में कोरोना के दौरान उपजे तनाव के दुष्परिणाम, ऐसे होंगे खत्म

कोरोना के दौरान बच्चों में उपजे तनाव और एक मोनोटोनस ज़िंदगी की वजह से बच्चे बोरडम का शिकार हो गए हैं। इस स्ट्रेस को हम हाइपो स्ट्रेस कहते हैं। इसकी कोपिंग स्ट्रेटेजी ढूंढने के लिए बच्चे एडवेंचर की तलाश कर रहे हैं। चाहे इसके लिए कोई भी रास्ता क्यों न अपनाना पड़े।

बच्चों में कोरोना के दौरान उपजे तनाव के दुष्परिणाम, ऐसे होंगे खत्म
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लॉकडाउन के बाद से बच्चे बाहर जाने की जगह घंटों मोबाइल फोन चलाते है। इस दौरान वह टिकटॉक समेत कुछ ऐसे गेम के शिकार हो रहे हैं। जहां शिक्षकों के सामान से लेकर घर के सामान व मारपीट करने तक टास्क मिल रहा है। यह विचित्र सा गेम कुछ ज्यादा ही लोकप्रिय हो रहा है। जो बच्चों के लिए बहुत ही हानिकारक है। ज्यादातर माता पिता अपने बच्चों के इस रवैये से परेशान हैं। ऐसे में बच्चों को कैसे सही रास्ते पर लाये इसके लिए टिप्स बता रही हैं- डॉ अल्पना वर्मा, प्रिंसिपल एवं डायरेक्टर एम्पल ड्रीम्स इंस्टिट्यूट ऑफ एजुकेशन, भोपाल



इन सबके पीछे क्या कारण हैं?

कोरोना के दौरान बच्चों में उपजे तनाव और एक मोनोटोनस ज़िंदगी की वजह से बच्चे बोरडम का शिकार हो गए हैं। इस स्ट्रेस को हम हाइपो स्ट्रेस कहते हैं। इसकी कोपिंग स्ट्रेटेजी ढूंढने के लिए बच्चे एडवेंचर की तलाश कर रहे हैं। चाहे इसके लिए कोई भी रास्ता क्यों न अपनाना पड़े। कोरोना के चलते ज़िंदगी में अनिश्चितता बढ़ गई है। जिसका असर बच्चों की मानसिकता पर भी पड़ा है। अगर घर मे तनाव की स्थिति लगातार बनी रहे, भय का माहौल हो तो बच्चे भी इसके चपेट में आ जाते हैं। भले ही हम बच्चों से इस विषय पर बात न करें पर हमारी मानसिक तरंगें बच्चों के मस्तिष्क तक पहुंच जाती हैं, जिसके घातक परिणाम होते हैं। उनकी अपरिपक्व सोच इन परिस्थितियों को एक अलग लेवल पर जज करने लगती है। या तो वो गुमसुम हो जाते हैं या बहुत वायलेंट हो जाते हैं। अब स्कूल खुल गए है और बच्चों को अभी भी ये समझ नहीं आ रहा कि वे एक साल तक घर मे रहने के बाद स्कूल के वातावरण से कैसे समायोजन करें। नतीजतन ऊटपटांग खेलों के माध्यम से अपना फ्रस्टेशन निकाल रहे हैं। अतः इस दौरान हमे घरों में और स्कूल में अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता है, जिससे हम बच्चों में कंफर्ट की स्थिति वापस ला सकें और स्कूलों में उनकी रचनात्मकता की प्रवृत्ति को पुनः जाग्रत कर सकें।



घरों में बच्ची की मन:स्थिति को सही करने के लिए उठाएं ये कदम

घरों में बच्चों की मनः स्थिति को पुराने स्वरूप में लाने के लिए सर्वप्रथम हमे अपने व्यवहार और सोच में परिवर्तन लाने की आवश्यकता है, अगर हम अपने तनाव को नियंत्रित कर पाए और उसका उचित प्रबंधन कर सकें तो बच्चों को भी इस स्थिति से बाहर ला पाएंगे। संगीत तनाव प्रबंधन का एक उचित माध्यम है, स्वयं भी संगीत को अपनायें एवम बच्चों को भी प्रेरित करें। यह विधा उनके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में उपयोगी सिद्ध होगी। दूसरे बच्चों के साथ पज़ल सॉल्व करें, इससे उनकी रचनात्मकता बढ़ेगी और वो डिस्ट्रक्टिव कार्यों की तरफ आकर्षित नहीं होंगे। बच्चे हमेशा कुछ नया करना और सीखना चाहते हैं, उन्हें इसके लिए प्रेरित करें जब वो कुछ नया या अलग प्रयोग करें तो उनकी प्रशंसा करें, उन्हें प्रोत्साहित करें। उन्हें जिम्मेदारी दें कि वो दूसरों को भी सिखाएं। उन्हें अपने कोरोना काल के अनुभवों को लिखने के लिए और फिर सबको पढ़ कर सुनाने के लिए कहें। इससे आप उनकी मनोस्थिति से परिचित भी हो सकेंगे और उसके अनुरूप अपनी रणनीति बना सकेंगे।


स्कूल में शिक्षक भी कर सकते हैं यह प्रयास

स्कूल में शिक्षक यदि बच्चों को ग्रुप में टास्क दें, एक को टीम लीडर बना दें, एक को कलेक्टर, एक को रिपोर्टर, एक को टाइम कीपर बना कर किसी विषय पर प्रोजेक्ट बनाने को दें, या किसी ट्रेज़र हंट जैसी गतिविधि करवाएं तो बच्चों की आपस की बॉन्डिंग जो कि कोरोना के चलते समाप्त प्रायः हो गई है, वह फिर से पैदा हो जाएगी, उनका खोया हुआ आत्मविश्वास वापस आ जायेगा और उनकी रचनात्मकता में वृद्धि होगी। स्कूल में भी बच्चों को कोरोनकाल के अनुभवों को साझा करने के लिए कहा जा सकता है, यह सभी बच्चों की साझा तकलीफ होगी, जिससे उनके बीच समानुभूति की भावना पैदा होगी। जो उनके तनाव को कम करने में मदद करेगी।

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