Child Handwriting: बच्चों की हैंडराइटिंग सुधारना चाहते हैं? इन ट्रिक्स से कुछ ही दिनों में दिखेगा अंतर

बच्चे की हैंडराइटिग सुधारने के तरीके।
Child Handwriting: माता-पिता अक्सर बच्चों की खराब हैंडराइटिंग को लेकर परेशान रहते हैं। स्कूल में अच्छी पकड़, आत्मविश्वास और बेहतर प्रस्तुति के लिए साफ-सुथरी लिखावट बहुत जरूरी मानी जाती है। लेकिन सही मार्गदर्शन और अभ्यास के बिना बच्चों की हैंडराइटिंग में सुधार होना मुश्किल लगता है।
अच्छी बात यह है कि बच्चों की हैंडराइटिंग जन्म से तय नहीं होती, बल्कि सही ट्रिक्स और रोज़ाना थोड़े से अभ्यास से इसे आसानी से सुधारा जा सकता है। कुछ आसान आदतें और गेम-जैसे एक्सरसाइज अपनाकर कुछ ही दिनों में लिखावट में साफ फर्क देखा जा सकता है।
हैंडराइटिंग सुधारने के आसान टिप्स
सही पेंसिल पकड़ना सिखाएं: हैंडराइटिंग सुधारने की शुरुआत सही ग्रिप से होती है। बच्चे को पेंसिल बहुत ज्यादा कसकर या बहुत ढीली न पकड़ने दें। तीन उंगलियों से हल्की पकड़ बनाना सबसे सही तरीका माना जाता है। गलत ग्रिप से हाथ जल्दी थकता है और अक्षर बिगड़ते हैं।
सही बैठने की आदत डालें: लिखते समय बच्चे की बैठने की पोजीशन बेहद अहम होती है। टेबल-कुर्सी की ऊंचाई सही होनी चाहिए और पीठ सीधी रहनी चाहिए। गलत पोस्चर से न सिर्फ लिखावट खराब होती है, बल्कि बच्चे का फोकस भी जल्दी टूट जाता है।
लाइन वाली कॉपी का इस्तेमाल करें: शुरुआत में मोटी लाइन या ट्रिपल लाइन वाली कॉपी में लिखवाना बेहतर होता है। इससे अक्षरों का साइज और शेप सही बनता है। धीरे-धीरे बच्चे को सिंगल लाइन कॉपी पर शिफ्ट करें, ताकि लिखावट में संतुलन बना रहे।
रोज़ाना थोड़ा अभ्यास कराएं: हैंडराइटिंग सुधारने के लिए रोज़ 15-20 मिनट का अभ्यास काफी होता है। ज्यादा दबाव डालने से बच्चा बोर हो सकता है। अक्षरों, शब्दों और छोटे वाक्यों का रोज़ अभ्यास कुछ ही दिनों में साफ बदलाव दिखाने लगता है।
ड्रॉइंग और कलरिंग से करें शुरुआत: ड्रॉइंग, ट्रेसिंग और कलरिंग जैसी एक्टिविटीज़ हाथों की पकड़ मजबूत बनाती हैं। इससे उंगलियों का कंट्रोल बेहतर होता है और लिखावट अपने-आप सुधरने लगती है। यह तरीका छोटे बच्चों के लिए खासतौर पर असरदार माना जाता है।
स्पीड से पहले क्लैरिटी पर ध्यान दें: अक्सर बच्चे जल्दी लिखने के चक्कर में अक्षर बिगाड़ देते हैं। शुरुआत में स्पीड की जगह साफ लिखने पर फोकस कराएं। जब लिखावट साफ हो जाए, तब धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई जा सकती है।
बच्चे को मोटिवेट करें, तुलना न करें: कभी भी बच्चे की तुलना दूसरों से न करें। छोटी-छोटी प्रगति पर उसकी तारीफ करें। पॉजिटिव मोटिवेशन से बच्चा खुद बेहतर लिखने की कोशिश करता है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
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लेखक: (कीर्ति)
