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एक्ट्रेस नहीं आईएएस बनना चाहती थी यामी गौतम, फिल्म ''उरी'' में अपने रोल पर किया खुलासा

हिमाचल प्रदेश में जन्मीं, चं यामी गौतम ने टीवी सीरियलों के अलावा साउथ इंडियन फिल्में की हैं। उन्होंने फिल्म ‘विक्की डोनर’ से बॉलीवुड में कदम रखा। इसके बाद कई फिल्में कीं।

एक्ट्रेस नहीं आईएएस बनना चाहती थी यामी गौतम, फिल्म

हिमाचल प्रदेश में जन्मीं, चंडीगढ़ में पली-बढ़ीं यामी गौतम ने आईएएस ऑफिसर बनने का सपना देखा था। लेकिन अचानक वह एक्टिंग वर्ल्ड में आ गईं। टीवी सीरियलों के अलावा साउथ इंडियन फिल्में की हैं।

साथ ही उन्होंने फिल्म ‘विक्की डोनर’ से बॉलीवुड में कदम रखा। इसके बाद कई फिल्में कीं। इन दिनों वह ‘बत्ती गुल मीटर चालू’ को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म और करियर से जुड़ी बातचीत यामी गौतम से।

फिल्म ‘बत्ती गुल मीटर चालू’ करने की क्या वजह रही?

पर्सनल और प्रोफेशनल दोनों लेवल पर इस फिल्म के सब्जेक्ट ने मुझे इंस्पायर किया। मेरा जन्म बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश में हुआ। मेरी परवरिश चंडीगढ़ में हुई, तो मुझे पता है कि किस तरह छोटी जगहों पर इलेक्ट्रिसिटी की प्रॉब्लम आती हैं।

किस तरह से बिजली विभाग लंबे-लंबे बिल भेज देता है। मेरे साथ भले ही ऐसा न हुआ हो, लेकिन मैंने सुना है कई लोगों के घर में बिजली बिल बहुत ज्यादा आया। इस वजह से मैं फिल्म की कहानी से पर्सनली कनेक्ट हुई।

मुझे यह बात बहुत अच्छी लगी कि ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ के बाद निर्देशक श्रीनारायण सिंह एक बार फिर अपनी इस फिल्म में आम लोगों से जुड़े सामाजिक मुद्दे को लेकर आ रहे हैं। उनकी खूबी है कि वह सामाजिक मुद्दे को भी एंटरटेनिंग और कमर्शियल एंगल से बनाते हैं।

फिल्म के अपने किरदार को लेकर क्या कहेंगी?

इस फिल्म में मैंने एडवोकेट गुलनार का किरदार निभाया है, जो काफी स्ट्रॉन्ग है, इंडिपेंडेंट है। वह फिल्म में एक बिजली कंपनी की तरफ से कोर्ट में मुकदमा लड़ती है।

क्या इस किरदार को निभाने के लिए आपको किसी वकील से टिप्स लेने की जरूरत महसूस हुई?

मैं मुंबई हाई कोर्ट गई थी। मैंने वहां एक पूरा सेशन अटेंड किया। कोर्ट के अंदर की पूरी कार्यवाही देखी। वकीलों के बहस करने का अंदाज देखा, काफी कुछ समझा। कार्यवाही शुरू होने से पहले वकीलों से बात की।

शाहिद कपूर और श्रद्धा कपूर के साथ आपकी यह पहली फिल्म है। इनके साथ एक्सपीरियंस कैसे रहे?

बहुत अच्छे रहे। शाहिद कपूर बेहतरीन कलाकार हैं। इस फिल्म में उनका अभिनय यादगार है। वह बहुत ही सपोर्टिव को-एक्टर हैं। हमें ज्यादा रिहर्सल करने की जरूरत भी नहीं पड़ी।

हम दोनों कोर्ट सींस में स्पॉन्टेनियस रहे। श्रद्धा कपूर भी बहुत बेहतरीन इंसान और कलाकार हैं। दो शॉट के बीच मौका मिलने पर हम तीनों अपनी बैठक लगा लेते थे, हंसी-मजाक किया करते थे।

अपनी आने वाली फिल्म ‘उरी’ को लेकर क्या कहना चाहेंगी?

यह फिल्म सितंबर 2016 में हुई सर्जिकल स्ट्राइक पर है। यह सर्जिकल स्ट्राइक हमारे देश की सेना का एक बड़ा कदम और उपलब्धि रही। मैंने इसमें एक कमांडर का किरदार निभाया है।

सुना है आपकी बहन सुरीली भी एक्टिंग वर्ल्ड में आ गई हैं। आप उन्हें कितनी सलाह दे रही हैं?

मुझे उन्हें सलाह देने की जरूरत महसूस नहीं होती। वह बहुत ही ज्यादा टैलेंटेड और सुलझी हुई हैं। वह बहुत अच्छी एक्ट्रेस हैं। मुझे इस बात की खुशी है कि वह एक वर्सेटाइल डायरेक्टर राजकुमार संतोषी के संग सारागढ़ी युद्ध पर बेस्ड फिल्म ‘बैटल ऑफ सारागढ़ी’ से बॉलीवुड में अपना करियर शुरू कर रही हैं।

सिनेमा में पिछले कुछ सालों से जो बदलाव आया है, उसको लेकर क्या कहेंगी?

मेरा मानना है कि मेरे करियर की पहली फिल्म ‘विक्की डोनर’ से बदलाव की शुरुआत हुई थी। यह कमर्शियल होते हुए भी मैसेज देने वाली फिल्म थी। अब तो हर तरह की फिल्में बन रही हैं। यह बहुत अच्छी बात है।

मुझे मीनिंगफुल सिनेमा करने में मजा आता है। मेरी राय में जब कुछ अलग तरह का सिनेमा बने, तो उसकी तारीफ की जानी चाहिए। दर्शकों को चाहिए कि वे ऐसी फिल्मों को बढ़ावा दें, इन्हें देखें जरूर।

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