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Ronit Roy Interview : किसी रिश्ते को कौन-सी बातें मजबूत बनाती हैं? मिला ये जवाब...

वेब सीरीज ‘कहने को हमसफर है’ रिश्तों के कशमकश की कहानी है। इसमें रोनित रॉय को काफी पसंद किया गया। अब इसका दूसरा सीजन डिजिटल मीडियम पर आ रहा है। दूसरे सीजन की कहानी क्या है? रिश्ते किन वजहों से पेचीदा हो जाते हैं? इन्हें कौन सी बातें मजबूती देती हैं, इस पर रोनित रॉय की राय क्या है?

Ronit Roy Interview : किसी रिश्ते को कौन-सी बातें मजबूत बनाती हैं? मिला ये जवाब...

अपने करियर की शुरुआत फिल्मों से करने वाले रोनित रॉय को जब बॉलीवुड में सफतला नहीं मिली तो उन्होंने छोटे पर्दे की तरफ रुख किया। टीवी ने उनको बुलंदियों पर पहुंचा दिया। रोनित ने एक के बाद एक हिट सीरियल दिए और टीवी के सबसे पॉपुलर स्टार बन गए। उनके कई किरदार दर्शकों के जेहन में आज भी बसे हुए हैं।

खासकर 'कसौटी जिंदगी की' में मिस्टर बजाज, 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' में मिहिर विरानी और 'अदालत' के के.डी. पाठक। इन दिनों रोनित टीवी, फिल्म और वेब सीरीज तीनों मीडियम में काम कर रहे हैं। पिछले दिनों एल्ट बालाजी पर उनकी वेब सीरीज 'कहने को हम सफर हैं' का दूसरा सीजन शुरू हुआ। यह वेब सीरीज रिश्तों की कशमकश को बयां करती है। बातचीत रोनित रॉय से।

'कहने को हमसफर है' वेब सीरीज जिन लोगों ने अब तक नहीं देखी, उन्हें इसके बारे में बताएं? सीजन टू में क्या होने वाला है, यह भी बताएं?

'कहने को हमसफर है' का जो पहला सीजन था, उसमें सबने देखा कि मैं शादीशुदा हूं, मेरे बच्चे हैं। इसके बावजूद मुझे अनन्या से प्यार हो जाता है। मैं अपनी फैमिली और बच्चों को छोड़कर अनन्या से शादी कर लेता हूं। आखिर में अनन्या मुझे छोड़ कर चली जाती है। इस शादी की वजह से अनन्या की जिंदगी बदल गई, कहीं न कहीं उसका काम, उसका करियर पीछे छूट गया, इसे वह अब वापस पाना चाहती है।

वह अपनी इंडीविजुएलिटी को वापस पाना चाहती है। ऐसा नहीं है कि रोहित ने अपने काम की वजह से अनन्या को छोड़ा। रोहित आज भी अनन्या से प्यार करता है। अनन्या, रोहित को छोड़कर गई थी। यह पहले सीजन की कहानी है। दूसरे सीजन में रोहित मेहरा, अनन्या को वापस लाने कतर गया है। कह रहाहै कि वापस आ जाओ लेकिन अनन्या उससे कहती हैं कि तुम ही यहां रुक जाओ।

रोहित कतर में नहीं रुक सकता क्योंकि उसका दिल्ली में बिजनेस है। वह अनन्या को कहता है किमुझे तेइस साल लगे हैं कंपनी बनाने में। तो अनन्या जवाब देती है कि मुझे भी आठ साल लगे हैं कंपनी बनाने में। अब यहां पर दोनों लोगों के लिए काम जरूरी है। उनकी इंडीविजुएलिटी जरूरी है। अब यह रिश्ता किस करवट बैठता है और क्या होता है, यही देखने को मिलेगा सीजन टू में।

आपकी नजर में विशेष रूप से ऐसी कौन-सी बात है, जो अकसर लोग रिश्ते निभाते समय भूल जाते हैं, जिससे रिश्ते पेचीदा हो जाते हैं?

आप किसी भी रिश्ते की बात करें चाहे माता-पिता, भाई-बहन, दोस्त, लाइफ पार्टनर या कोई भी रिश्ता हो। जैसे आपकी पसंद और नापसंद होती है, वैसे ही दूसरे की भी होती है।अकसर लोग अपनी इच्छाओं और पसंद-नापसंद को दूसरों पर थोपते हैं। मुझे लगता है कि यह गलत है, ऐसा नहीं होना चाहिए।

किसी रिश्ते को कौन-सी बातें मजबूत बनाती हैं?

प्यार, अच्छी समझ का नाम है। प्यार, त्याग का नाम है। प्यार, सहयोग का नाम है। जब आप किसी रिश्ते को निभाते हैं, उसे जीते हैं तो ये सभी बातें अपना काम करती हैं। जब इन बातों पर ध्यान दिया जाता है तब रिश्ते मजबूत बनते हैं, जब नहीं दिया जाता तो रिश्ते बिखर जाते हैं।

आप इतने सालों से एकता कपूर के साथ काम कर रहे हैं। जब यह प्रोजेक्ट आया तो क्या मन में कोई सवाल था?

बालाजी के साथ शुरुआती दौर में काम करने की बात है। एक बार मेरी राइटर के साथ प्रॉब्लम हो गई। मैंने राइटर से कहा कि यह मुमकिन नहीं, ऐसा नहीं होता, यह बेवकूफी है। उसने मुझसे कहा कि सर आप एकता जी से बात करिए। हमें जो नरेटिव दिया गया था, हमने वैसा ही किया है। फिर मैंने एकता को मैसेज भेजा और उनका जवाब आया कि मुझ पर भरोसा रखो और कर लो।

मैंने ऐसा ही किया। सबकुछ पॉजिटिव रहा। इसके बाद मैंने एकता को कभी फोन या मैसेज पर कोई इस तरह का सवाल नहीं किया। आज हमें साथ काम करते हुए 19 साल हो गए हैं। मैं उनकी इंडीविजुएलिटी की इज्जत करता हूं। वो मेरी इंडीविजुएलिटी की इज्जत करती हैं।

यह तो एकता की बात हुई। बाकी लोगों के साथ काम चुनने को लेकर आपका क्या नजरिया रहता है?

मैं स्क्रिप्ट चूज नहीं करता। अगर मुझमें या किसी भी एक्टर में इतनी अक्ल होती तो कोई फिल्म फ्लॉप ही न होती। सच यह है कि हर एक्टर की फिल्म फ्लॉप हुई है। मैं मेकर को देखता हूं। उनसे जुड़ता हूं, उनकी सोच से जुड़ता हूं। एक अच्छा मेकर बुरी स्क्रिप्ट को भी अच्छा बना सकता है, एक बुरा मेकर अच्छी खासी स्क्रिप्ट का भी कबाड़ा कर सकता है। जब किसी इंसान को आपने समझ लिया तो उसकी समझ को समझना मुश्किल नहीं होता।



प्रस्तुति: रेणु खंतवाल

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