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Shekhar Suman Interview : ''ये कहानियां सुनकर दर्शकहो जाएंगे हैरान''

केवल टीवी ही नहीं, कई फिल्मों में भी शेखर सुमन ने अपनी बेहतरीन प्रतिभा का परिचय दिया है। तीन दशक से भी ज्यादा समय से वह दोनों माध्यमों में अलग-अलग रूपों में लगातार एक्टिव हैं। हाल में ही उन्होंने सोनी मैक्स-2 चैनल पर ‘लाइट्स-कैमरा-किस्से’ के तीसरे सीजन की शुरुआत की है। इस शो, आज के दौर के सीरियल्स, फिल्मों में बदलाव और कॉमेडी के गिरते स्तर पर हरिभूमि की शेखर सुमन से फोन पर बातचीत हुई। प्रस्तुत है इसके प्रमुख अंश।

Shekhar Suman Interview :
केवल टीवी ही नहीं, कई फिल्मों में भी शेखर सुमन ने अपनी बेहतरीन प्रतिभा का परिचय दिया है। तीन दशक से भी ज्यादा समय से वह दोनों माध्यमों में अलग-अलग रूपों में लगातार एक्टिव हैं। हाल में ही उन्होंने सोनी मैक्स-2 चैनल पर ‘लाइट्स-कैमरा-किस्से’ के तीसरे सीजन की शुरुआत की है। इस शो, आज के दौर के सीरियल्स, फिल्मों में बदलाव और कॉमेडी के गिरते स्तर पर हरिभूमि की शेखर सुमन से फोन पर बातचीत हुई। प्रस्तुत है इसके प्रमुख अंश।
सवाल- ‘लाइट्स-कैमरा-किस्से’ के नए सीजन में क्या कुछ नया देखने को मिलेगा?
जवाब- सच कहूं तो मैं कुछ नया लाने वाला नहीं हूं। नया काम तो प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, राइटर और चैनल का होता है। मैं तो केवल उसे प्रेजेंट कर रहा हूं। हां, उसे प्रेजेंट करने में जो और बेहतर हो सकता है, उसे करने की कोशिश करता रहता हूं। इस बार नई कहानियां हैं, नया जोश है। पहले दो सीजन दर्शकों ने पसंद किए इसलिए तीसरा सीजन आ रहा है, इस बात से मैं उत्साहित हूं। इस बार मैं करीब 78 कहानियां सुनाऊंगा। इनमें से कई अचंभित करने वाली दिलचस्प कहानियां भी दर्शकों को सुनने को मिलेंगी। ऐसी कहानियां जिनके बारे में बहुत कम लोगों को पता है, उन्हें सुनकर दर्शक हैरान हो जाएंगे।
सवाल- इसमें जो कहानियां आप सुनाते हैं, बेशक रोचक होती हैं लेकिन आपका उन्हें सुनाने का अंदाज भी लाजवाब होता है! ऐसा कैसे कर पाते हैं?
जवाब- मैं अपनी तरफ से जो बेहतर हो सकता है, करता हूं लेकिन दर्शकों को अगर मेरा अंदाज भाता है तो यह उनका प्यार है, जर्रानवाजी है। दरअसल, शुरू से मेरी खुद की गहरी रुचि ऐसी कहानियों में रही है। मुझे ये कहानियां बहुत अट्रैक्ट करती हैं। मेरी दुनिया इसी फिल्मी दुनिया से जुड़ी है, शायद इसीलिए मैं इसे पूरे दिल से प्रस्तुत कर पाता हूं। किसी और तरह की कहानी सुनानी होती तो शायद मैं इतनी गहराई से नहीं जुड़ पाता।
सवाल- आपको फिल्म-टीवी वर्ल्ड से जुड़े तीन दशक से ज्यादा का समय हो चुका है। क्या कहेंगे अपने सफर और अनुभवों के बारे में?
जवाब- मैं जब पलटकर देखता हूं तो महसूस होता है कि मेरा यह सफर बहुत खूबसूरत रहा है। मेरा सपना था कि अभिनेता बनूं और मैं बन गया। आज तीन दशक बीतने के बाद भी दर्शकों का इतना प्यार, सम्मान मिल रहा है, ये बहुत बड़ी बात है मेरे लिए। मैं तो इसे ईश्वर की असीम अनुकंपा मानता हूं। जिंदगी में सब अच्छा हो तभी वो खूबसूरत नहीं बनती, मेरा मानना है कि संघर्ष और दर्द भी खूबसूरत होता है। अगर हम संघर्ष और दर्द का अनुभव नहीं करेंगे तो खुशी और सफलता की महत्ता नहीं समझ पाएंगे, तो अपने इस सफर में हर तरह के अनुभव हुए और सच में बहुत बेहतरीन रहा मेरा यह सफर।
सवाल- बीती सदी के अंतिम दशकों में आपने फिल्में और सीरियल्स किए और आज के दौर में भी एक्टिव हैं। बतौर एक्टर शेखर सुमन इनमें क्या अंतर महसूस करते हैं, क्या कहना चाहेंगे बदलावों के बारे में?
जवाब- वो भी एक दौर था, ये भी एक दौर है, दौर तो बदलता ही रहता है। उसमें भी बहुत कुछ अच्छा था, आज भी बहुत कुछ अच्छा है। बदलाव का नाम ही तो जिंदगी है। इस इंडस्ट्री में भी समय के साथ बदलाव हुए हैं, आगे भी होते रहेंगे। फिल्में, भाषा, रवैया, तकनीक सब बदल रही है। पहले कोई फिल्म मुंबई में रिलीज होती तो दूसरे दूर-दराज के शहरों तक पहुंचने में महीनों लग जाते थे, आज इंस्टेंटली पूरी दुनिया में पहुंच जाती है। उस इंतजार का अपना मजा था, आज इस तेजी का अपना मजा है। लेकिन एक चीज की कमी जो खलती है, वो है ठहराव। आज जीवन ने तेज गति पकड़ ली है। इसलिए हम जीवन के किसी पल को गहराई से महसूस नहीं कर पाते हैं, आनंद नहीं ले पाते हैं। इस वजह से इंसानियत और रिश्ते कहीं पीछे छूटते जाते हैं। इनका रिफ्लेक्शन हमें फिल्मों और सीरियल्स में भी दिखाई पड़ता है। उनके कंटेंट भी समय के अनुसार बदले हैं। बहरहाल, नजरिया बदलकर देखें तो हर दौर में कुछ अच्छा मिलेगा और उससे हमें रिलेट करना चाहिए।
सवाल- दर्शकों ने आपको कॉमेडी सीरियल्स में काफी पसंद किया है। उस दौर के उलट आज के सीरियल्स में नेचुरल के बजाय कॉमेडी जबरन डाली जाती है। कॉमेडी का लेवल इस तरह कमजोर क्यों हुआ है?
जवाब- इसकी वजह है बनाने वालों की सोच, रचनात्मकता और अध्ययन की कमी। जब किसी भी फील्ड में ऐसे लोग आ जाते हैं, जिनका टार्गेट केवल पैसे कमाना होगा तो उसका स्तर गिरेगा ही। केवल शब्दों को तोड़ने-मरोड़ने, लड़के को लड़की बनाने से हास्य जन्म नहीं लेता है। अब अच्छे राइटर्स की बहुत कमी हो गई है। जब अच्छा लिखा जाएगा तभी एक्टर्स के लिए स्कोप होता है उसे बेहतर ढंग से प्रेजेंट करे। जब अयोग्य और गलत लोग कुछ करेंगे तो उसका स्तर तो घटना तय है। यही वजह है कि कॉमेडी का स्तर भी घटता जा रहा है।

फिल्म ‘पत्थरबाज’ बनाने में बिजी हूं

शेखर सुमन ने 2014 में फिल्म ‘हार्टलेस’ बनाई थी। अब आगे की उनकी क्या प्लानिंग है? पूछने पर वह बताते हैं, ‘मैं एक फिल्म लिख रहा हूं, बना रहा हूं-पत्थरबाज।’ यह कश्मीर के मसलों पर आधारित कहानी है, बहुत सेंसिटिव फिल्म है। इसमें यह दिखाया जाएगा कि ये पत्थरबाज कौन हैं, कैसे बनते हैं, क्यों बनते हैं? क्या इनका जो रवैया है, इनकी जो मांग है क्या वो वाजिब है? इस फिल्म के जरिए 1947 से लेकर, कश्मीरी पंडितों की समस्या और पत्थरबाजों के एक्टिव होने जैसी तमाम बातों को निष्पक्ष ढंग से दिखाने और इन सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करना चाहता हूं।’
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