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Exclusive Interview Pankaj Triphati: सुपरस्टार रजनीकांत को देखने के लिए फिल्म ''काला'' में किया काम

पंकज त्रिपाठी को एक्टिंग वर्ल्ड में चौदह साल हो गए हैं। उन्होंने चालीस से ज्यादा फिल्में और लगभग साठ से ज्यादा टीवी सीरियल किए हैं। लेकिन पंकज को अलग पहचान बॉलीवुड में पिछले कुछ सालों में मिली है। पंकज नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित हैं।

Exclusive Interview Pankaj Triphati: सुपरस्टार रजनीकांत को देखने के लिए फिल्म

पंकज त्रिपाठी को एक्टिंग वर्ल्ड में चौदह साल हो गए हैं। उन्होंने चालीस से ज्यादा फिल्में और लगभग साठ से ज्यादा टीवी सीरियल किए हैं। लेकिन पंकज को अलग पहचान बॉलीवुड में पिछले कुछ सालों में मिली है।

‘फुकरे’, ‘निल बटे सन्नाटा’, ‘मसान’, ‘बरेली की बर्फी’, ‘फुकरे रिटर्न्स’, ‘न्यूटन’ जैसी अलग-अलग जॉनर की फिल्मों में उन्होंने बेहतरीन अदाकारी की है। फिल्म ‘न्यूटन’ के लिए उन्हें स्पेशल मेंशन कैटेगिरी में नेशनल अवार्ड मिला।

जल्द ही वह साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत के साथ फिल्म ‘काला’ में नजर आएंगे। इसके अलावा भी कई फिल्में कर रहे हैं। बातचीत, पंकज त्रिपाठी से।

आपको रजनीकांत के साथ फिल्म ‘काला’ कैसे मिली?

जब फिल्म ‘काला’ ऑफर की गई और बताया गया कि फिल्म में रजनीकांत लीड रोल में हैं तो मैं समझ नहीं पाया कि कैसे अपनी फीलिंग्स को जाहिर करूं। मैं रजनी साहब के साथ शूटिंग करने को लेकर एक्साइटेड था।

हमेशा लगता था कि शूटिंग छोड़कर बस उनकी एक्टिंग करते हुए देखूं, उनसे बात करूं। लेकिन ऐसा मुमकिन कहां था, मुझे अपने किरदार पर भी ध्यान देना था। अभी इस फिल्म की कहानी और किरदार की डिटेल बताने से हमें मना किया गया है।

रजनीकांत के साथ एक्टिंग करने के एक्सपीरियंस कैसे रहें?

रजनीकांत करिश्मायी अभिनेता हैं। डायलॉग भी उन्हें याद करने की जरूरत नहीं पड़ती थी। बस एक बार पढ़ लेते हैं और बहुत ही अच्छे से शॉट दे देते हैं। साथ ही रजनीकांत साहब बहुत ही विनम्र इंसान हैं।

हाल ही में आपकी एक फिल्म ‘फेमस’ आई थी, इसमें जैकी श्रॉफ, जिमी शेरगिल, के.के. मेनन जैसे बेहतरीन एक्टर्स थे। क्या इनके बीच बतौर एक्टर इनसिक्योर फील किया?

यह फिल्म डाकुओं की जिंदगी पर थी। मैं इस तरह की फिल्म करना चाहता था। जैकी श्रॉफ, जिमी शेरगिल, के.के. मेनन जैसे बेहतरीन एक्टर्स के साथ काम करना बहुत ही अच्छा एक्सपीरियंस रहा।

लेकिन मैंने इसके साथ काम करते हुए कभी भी इनसिक्योर नहीं फील किया। यह सब कमाल के एक्टर हैं। मैं तो धीरे-धीरे एक्टिंग में निखर रहा हूं।

फिल्म ‘न्यूटन’ के लिए आपको नेशनल अवार्ड मिला है, इसके बाद से क्या बतौर एक्टर आप अपनी जिम्मेदारी बढ़ी हुई महसूस करते हैं?

जी, एक कलाकार के रूप में मेरी जिम्मेदारी बहुत बढ़ी है। लेकिन मैं फिल्में अवार्ड पाने के लिए नहीं करता हूं।

सुना है कि नेशनल अवार्ड मिलने के बाद आपने अपनी फीस बढ़ा दी है?

नहीं, नेशनल अवार्ड और साइनिंग अमाउंट का कोई रिलेशन नहीं है। नेशनल अवार्ड मिलने से एक एक्टर की रेस्पेक्ट बढ़ जाती है। जब किसी एक्टर की फिल्में हिट होती हैं, तभी उसकी फीस बढ़ती है। फिल्म ‘फुकरे रिटर्न्स’ की सफलता के बाद फिल्ममेकर्स ने मेरे घर बड़े साइनिंग अमाउंट के चेक भेजे, यह देखकर मुझे हैरानी हुई।

आज आपको बॉलीवुड में पहचान मिली, लेकिन इसके लिए बहुत स्ट्रलग करना पड़ा। स्ट्रगल टाइम को कैसे देखते हैं?

मैं नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से हूं। मुंबई में बहुत स्ट्रगल किया। जो फिल्म मिली, कर लेता था। 365 दिन काम करता था। कभी ऐसा भी हुआ जब सुबह दिल्ली तो शाम मुंबई में शूटिंग कर रहा हूं।

इसका अंजाम यह हुआ कि मुझे स्लिप डिस्क की समस्या हुई। इस वजह से कुछ फिल्में छोड़नी पड़ीं। फिल्ममेकर्स मेरी समस्या को नहीं समझते थे। लेकिन अब लगता है कि वह दिन दूर नहीं, जब फिल्ममेकर्स मेरी सहूलियत का ध्यान रखेंगे।

हमारे कई बॉलीवुड एक्टर, हॉलीवुड में जा रहे हैं, क्या आपकी कोई ऐसी ख्वाहिश है?

मेरी इंग्लिश लैंग्वेज अच्छी नहीं है, इस वजह से इन फिल्मों को लेकर ज्यादा एक्साइटेड नहीं रहता हूं। हां, मैंने ‘मैंगो ड्रीम्स’ नाम की इंग्लिश फिल्म की थी, जिसे साउथ अफ्रीका में मुझे बेस्ट एक्टर का अवार्ड मिल चुका है।

इस फिल्म की कहानी अहमदाबाद से शुरू होती है और मुंबई में खत्म होती है। अगर आगे अच्छा किरदार मिलेगा तो विदेशी फिल्में करूंगा, लेकिन हॉलीवुड में फिल्म करना मेरा सपना नहीं है।

अपनी सफलता का क्रेडिट सबसे ज्यादा पंकज त्रिपाठी किसे देना चाहते हैं?

‘मेरी मां अवंति देवी की उम्र 84 साल है, उन्होंने हमेशा मुझे प्रोत्साहित किया। पत्नी मृदुला त्रिपाठी का भी बहुत योगदान रहा, जब मैं स्ट्रगल कर रहा था तो वे ही घर चलाती थीं, वह टीचर रही हैं।

भावना तलवार जिन्होंने मुझे पहली फिल्म ‘धर्म’ दी और अश्विनी अय्यर तिवारी ने जिन्होंने फिल्म ‘निल बटे सन्नाटा’ में मेरी इमेज ही बदल दी। इन सभी महिलाओं ने मुझ पर विश्वास किया।

अगर इनका साथ न मिला होता तो पंकज त्रिपाठी दुनिया के सामने एक्टर के रूप में न आया होता। एक्टिंग की बजाय मैं कहीं खेती कर रहा होता।’

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