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इंस्टाग्राम की इस पोस्ट ने नीना गुप्ता को बनाया ''मां'', सोशल मीडिया पर जाहिर किया दुख!

नीना गुप्ता एक बेहतरीन अदाकारा ही नहीं एक कुशल डायरेक्टर भी हैं। वह तीन दशक से भी अधिक समय से एक्टिंग वर्ल्ड में एक्टिव हैं।

इंस्टाग्राम की इस पोस्ट ने नीना गुप्ता को बनाया
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नीना गुप्ता एक बेहतरीन अदाकारा ही नहीं एक कुशल डायरेक्टर भी हैं। वह तीन दशक से भी अधिक समय से एक्टिंग वर्ल्ड में एक्टिव हैं। इन दिनों कुछ अलग तरह की फिल्मों में नीना गुप्ता नजर आ रही हैं।

‘वीरे दी वेडिंग’, ‘मुल्क’ के बाद अब वह ‘बधाई हो’ में नजर आएंगी, जिसमें उन्होंने ऐसी महिला का किरदार निभाया है, जो अधेड़ उम्र में गर्भवती हो जाती है। इस फिल्म और करियर से जुड़ी बातचीत, नीना गुप्ता से।

अब आप अपने करियर से खुश हैं या..?

मैं तो एक भूखी कलाकार हूं, जो और अधिक काम करना चाहती है। मैं चुनौतीपूर्ण किरदार निभाना चाहती हूं, जो असंभव नहीं है। हां, उम्र के इस पड़ाव पर मुझे जिस तरह के किरदार मिल रहे हैं, उससे मैं बहुत खुश हूं।

मैं सिर्फ मां के किरदार नहीं निभा रही हूं बल्कि उनमें काफी वैरायटी है। हर फिल्म में मेरा किरदार अलग है। मैं स्ट्रॉन्ग कैरेक्टर निभा रही हूं। यह मेरे करियर का सुनहरा समय चल रहा है।

फिल्मों में मुझे इससे पहले कभी भी इतने बेहतरीन किरदार नहीं मिले थे। हां, शुभंकर घोष की फिल्म ‘छोकरी’ में मुझे बहुत बेहतरीन किरदार मिला था। जिसकी वजह से मुझे सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था। लेकिन मेरी कुछ बेहतरीन फिल्में ऐसी भी रहीं, जो आज तक सिनेमाघरों में नहीं पहुंच पाईं।

फिल्म ‘बधाई हो’ के प्रोमोज में आप एक अधेड़ उम्र की गर्भवती महिला के तौर पर नजर आ रही हैं, क्या है इस फिल्म की कहानी और आपका किरदार?

इसकी कहानी के केंद्र में एक अधेड़ उम्र की महिला का प्रेग्नेंट होना है, मुझे यही किरदार निभाना था। मैंने उसी वक्त हामी भर दी। मैंने इसमें प्रियंवदा कौशिक का किरदार निभाया है।

जिसे पहनावे की कोई समझ नहीं है, वह जिंदगी में कभी भी ब्यूटी पार्लर नहीं गई। प्रियंवदा के पति मिस्टर कौशिक (गजराव राव) रेलवे में टिकट चेकर हैं। उसके दो बेटे हैं। एक बेटा नकुल शादी करने लायक है, जिसकी प्रेमिका भी है।

दूसरा बेटा बारहवीं कक्षा में पढ़ रहा है। जब अधेड़ उम्र में प्रियंवदा गर्भवती हो जाती है, तब लोग उसे शर्मसार करने लगते हैं। यह फिल्म प्रियंवदा के अप्रत्याशित गर्भधारण के अलावा पारिवारिक जीवन और रिश्तों पर भी बात करती है।

यह मुद्दा आज की तारीख में हर जगह चर्चा में है। जबकि पहले यह कोई मुद्दा नहीं होता था। उन दिनों लड़कियों की शादी बहुत कम उम्र में हो जाती थी और जब वह चालीस या पचास की उम्र में मां बनती थी, तब तक पता चलता था कि उनकी बेटी या बेटा भी शादी के लायक है, छोटे शहरों में आज भी यही स्थिति है।

आगे की स्लाइड में जानिए उनकी पोस्ट के बारे में..

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