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इम्तियाज के मजनू अविनाश फिल्म की शूटिंग के समय हो गए थे पागल, करने लगे कुछ ऐसा

फिल्म ''लैला-मजनू'' में अविनाश तिवारी और तृप्ति डिमरी लीड रोल में हैं। फिल्म ''लैला मजनू'' सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है।

इम्तियाज के   मजनू   अविनाश फिल्म की शूटिंग के समय हो गए थे पागल, करने लगे कुछ ऐसा
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फिल्म 'लैला-मजनू' में अविनाश तिवारी और तृप्ति डिमरी लीड रोल में हैं। फिल्म 'लैला मजनू' सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है।

अपनी अब तक की जर्नी को लेकर क्या कहेंगे?

मैंने एक्टिंग करियर की शुरुआत ओम कटारे के साथ थिएटर करते हुए की थी। ‘दिल्ली ऊंचा सुनती है’, ‘चोर चोरी से’ जैसे कुछ नाटकों में एक्टिंग की। दिल्ली में बैरी जॉन से एक्टिंग की ट्रेनिंग ली, उनके साथ एक नाटक ‘कन्यादान’ किया।

उसके बाद मैं अमेरिका के न्यूयॉर्क फिल्म अकादमी चला गया, वहां लगभग सवा साल की ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग लेने के अलावा वहां पर ऑफ ब्राडवे में एक नाटक किया। फिर कुछ शॉर्ट फिल्में कीं। फिर बॉलीवुड में स्ट्रगल किया। मैंने अमिताभ बच्चन के साथ टीवी सीरियल ‘युद्ध’ में एंटी हीरो का किरदार निभाया था। बाद में फिल्म ‘तू है मेरा संडे’ में काम किया था।

फिल्म ‘लैला मजनूं’ कैसे मिली?

इस फिल्म को करने के पीछे दो बड़ी वजहें रहीं। पहली इम्तियाज अली और दूसरी ‘बालाजी मोशन पिक्चर्स’ यानी कि एकता कपूर। एकता कपूर तो फिल्म, टीवी और डिजिटल हर मीडियम पर अपना सिक्का जमाए हुए हैं।

इसके अलावा मुझे उस किरदार को निभाने का मौका मिल रहा था, जिसका नाम हम सदियों से सुनते आए हैं। भले ही हमारी पीढ़ी के लोग इस किरदार या इस अमर प्रेम कहानी के बारे में ज्यादा न जानते हों।

लेकिन मजनूं का किरदार शारीरिक, मानसिक और दिमागी स्तर पर बहुत अलग है। मेरे तमाम सीनियर एक्टर मुझसे जेलस फील कर रहे होंगे कि उन्हें यह किरदार निभाने का मौका क्यों नहीं मिला? मुझे उम्मीद है कि दर्शक इस फिल्म और मेरे काम को पसंद करेंगे।

मजनूं का किरदार निभाने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ी?

फिल्म ‘लैला मजनूं’ के लिए मैंने काफी मेहनत की। इस फिल्म के लिए मैंने महज 17 दिनों के अंदर 12 किलो वजन बढ़ाया। इतना ही नहीं मजनूं संजीदा प्यार में यकीन करता है। उसके लिए प्यार साधारण नहीं बल्कि असाधारण है, किसी भी कल्पना से परे है।

मजनूं की इस संजीदगी को समझने के लिए मुझे काफी होमवर्क करना पड़ा। किरदार की आत्मा में घुसने के लिए जब सभी कलाकार और यूनिट के लोग कश्मीर में होटल में रह रहे थे, तब भी मैं कश्मीर की ठंड में बाहर लकड़ी पर बैठकर समय बिताता था। वहां गांव के लोग मुझे पागल पुकारने लगे थे।

अपने किरदार को लेकर क्या कहेंगे?

दरअसल, हम सभी कई तरह के सामाजिक ढांचों की बंदिश में जिंदगी जी रहे हैं। पर जब आप इन सामाजिक ढांचों से परे जाते हैं, तो आजादी और ताकत का अहसास होता है। वही मजनूं है। प्यार को लेकर उसका जुनून है। मजनूं ऐसे प्यार को जाहिर करने का प्रयास करता है, जो कि हर तरह के ढांचों से अलग है। वह अपने अंदर और बाहर को जोड़ने का प्रयास करता है।

प्यार को लेकर आपकी अपनी क्या सोच है?

पहली बात तो साफ कर दूं कि मैं मजनूं से मेल नहीं खाता। हां, वह मेरे लिए इंस्प्रेशन जरूर है। मेरा मानना है कि प्यार एक ऐसी फीलिंग है, जो बहुत प्योर है।

आपने सीरियल ‘युद्ध’ में अमिताभ बच्चन के साथ काम किया, कैसा एक्सपीरियंस था?

मैं दर्शक के तौर पर भी उनका बहुत बड़ा फैन रहा हूं। मैं सेट पर उनको बड़े गौर से देखा करता था। मेरा पहला सीन होने के बाद सबसे पहले ताली उन्होंने ही बजाई थी। मैं तो सेट पर काफी नर्वस था, लेकिन उन्होंने मेरा उत्साह बढ़ाया।

उन्होंने एक कलाकार के तौर पर जो इज्जत बख्शी वह मेरे लिए बहुत मायने रखती है। उन्होंने मुझे कई कहानियां और किस्से सुनाए। यह एक्सपीरियंस कभी न भूलने वाला है।

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