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इंडियन आइडल 9: सिंगर्स को फिर जज करेगी पुरानी तिकड़ी

2004 में इंडियन आइडल की शुरुआत हुई थी।

इंडियन आइडल 9: सिंगर्स को फिर जज करेगी पुरानी तिकड़ी
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मुंबई. सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन का पॉपुलर सिंगिंग रियालिटी शो ‘इंडियन आइडल’ फिर शुरू हो रहा है। यह शो का नवां सीजन है। यह शो टैलेंटेड सिंगर्स को बेहतरीन मौका देता है। इस बार शो की सबसे खास बात यह है कि शो के जजेज अनु मलिक, सोनू निगम और फराह खान हैं, जो पहले सीजन के जजेज थे। शो से जुड़ी खास बातें बता रहे हैं तीनों जज।
कोशिश होगी बेस्ट सिंगर
को मिले सही प्लेटफॉर्म
अनु मलिक, म्यूजिक डायरेक्टर-सिंगर
बारह साल बाद मुझे इंडियन आइडल का हिस्सा बनकर बहुत खुशी हो रही है। पुरानी यादें ताजा हो रही हैं, जब हमने पहली बार इसके लिए आॅडिशन शुरू किया था। बारह सालों में काफी कुछ बदल गया है। लेकिन सोनू, फराह और मुझमें कोई बदलाव नहीं आया है। इस बार भी आॅडिशन के दौरान मेरी और फराह की वैसे ही नोक-झोंक चलती रहती थी। सोनू हमारे बीच सुलह कराते थे, जैसे पहले भी किया करते थे। इस सीजन में मैंने महसूस किया कि लोग हमें देखकर बेहद खुश हैं। सिंगर भी आॅडिशन देने आ रहे थे, तो वो भी यही कह रहे थे कि हम तीनों जजेज को एक बार फिर साथ देखकर उन्हें खुशी हो रही है। जहां तक सिंगर्स की बात है, तो कमाल के सिंगर शो में आए हैं। सभी की सिंगिंग का लेवल बहुत ही हाई है। इतने बेहतरीन सिंगिंग टैलेंट में से इंडियन आइडल चुनना हमारे लिए काफी मुश्किल होगा। शो के जज के तौर पर मैं सिंगर्स की आवाज को परखूंगा। हमारी कोशिश होगी कि बेस्ट सिंगर को सही प्लेटफॉर्म शो के जरिए मिले।
देखूंगा सिंगर्स की आवाज में
कितना बेस और रिद्म है
सोनू निगम, सिंगर
हमने 2004 में इंडियन आइडल की शुरुआत की थी। उस वक्त मैं अकेला ऐसा शख्स था जिसने क्रिकेटर सिमोन कॉवेल की किताब ‘आई डोंट मीन टू बी रूड’ के अनुसार इंडियन आइडल के फॉर्मेट के पीछे की फिलॉसफी समझी थी। उसी पर बेस्ड होकर सीजन वन को जज किया था। पिछले पांच सालों से मैं टीवी से दूर रहा हूं, इसलिए जब मैंने टीवी पर वापसी ‘इंडियन आइडल सीजन 9’ से की, तो मुझे बहुत खुशी हुई। फराह और अनु जी से मेरा दिल का रिश्ता है। जहां तक शो की बात है, तो इस बार हमने देश भर से हजारों सिंगर्स में से बेहतरीन सिंगर्स को इंडियन आइडल के लिए सेलेक्ट किया है। बतौर जज मैं शो में सिंगर्स की आवाज पर फोकस करूंगा। सिंगर्स की आवाज में कितना बेस है, कितनी रिद्म है। वह दिल से कितना गाते हैं, कितना रियाज करते हैं, इस बात का भी ख्याल रखूंगा। यही मेरा सेलेक्शन क्राइटेरिया होगा। हमारे देश में टैलेंट की कमी नहीं है। इंडियन आइडल के मंच के जरिए हम उस नायाब टैलेंट को मौका दे रहे हैं।
एक डायरेक्टर की नजर से
सिंगर्स की सिंगिंग परखूंगी
फराह खान, कोरियोग्राफर-डायरेक्टर
जब 2004 में मैंने ‘इंडियन आइडल’ का जज बनने का फैसला किया था, तो उस वक्त अच्छी तरह जानती थी कि लोग सवाल जरूर उठाएंगे कि मुझे किस आधार पर जज बनाया जा रहा है, क्योंकि ना तो मैं सिंगर हूं, ना ही म्यूजिक डायरेक्टर हूं। लेकिन मैंने शो को जज किया। वही सवाल एक बार फिर सीजन 9 मे भी उठाया गया। इस पर मैं कहना चाहूंगी कि कोरियोग्राफर होने के नाते मुझे संगीत की और खासतौर पर अच्छे संगीत की अच्छी परख है। एक कोरियोग्राफर की नजर से सिंगर्स की सिंगिंग परखूंगी। मुझे संगीत की समझ है। मैं यह देखती हूं कि सिंगर अपनी सिंगिंग से आॅडियंस के दिलों में जगह बना पाएंगे या नहीं। हमारी फिल्म इंडस्ट्री मे कई ऐसे गायक आए हैं, जिन्होंने संगीत की विधिवत शिक्षा नहीं ली थी। लेकिन उनका अंदाज ऐसा था कि आज भी उनके गाने लोगों के दिलों पर राज कर रहे हैं। बतौर जज मैं ऐसे ही गायक की तलाश करना चाहूंगी।
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